McDonald’s के 169 रेस्टोरेंट हो सकते हैं बंद, हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर लटकी तलवार

नई दिल्ली।

दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत 12 राज्यों में मैकडॉनल्ड्स के 169 रेस्त्रां में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। इन 12 राज्यों में मैकडॉनल्ड्स के रेस्त्रां को चलाने वाली कंपनी कनॉट प्लाजा रेस्त्रां प्राइवेट लिमिटेड का करार खत्म होने के बाद इन हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा बन गया है। हालांकि, कनॉट प्लाजा अभी भी इस पूरे मामले का कानूनी रास्ता तलाशने मे जुटा है।

15 दिनों में बंद करना होगा मैकडॉनल्ड्स ब्रांड का इस्तेमाल

मैकडॉनल्ड्स की ओर से जारी एक बयान में कहा है, ”आज (सोमवार, 21 अगस्त) को हमने मैकडॉनल्ड्स इंडिया और कनॉट प्लाजा रेस्त्रां प्राइवेट लिमिटेड (सीपीआरएल) के बीच उत्तर और पूर्व भारत में 169 रेस्त्रां को लेकर फ्रेचाइंजी करार खत्म करने का नोटिस जारी किया है.” इस नोटिस में उन 43 रेस्त्रां का नाम भी शामिल है जिनका बीते दिनों इटिंग हाउस के लाइसेंस का रिन्यू नहीं हुआ था।

बयान के मुताबिक, इन सभी रेस्त्रां के लिए सीआरपीएल को मैकडॉनल्ड्स ब्रांड और उससे जुड़ी हुई चीजों का इस्तेमाल अगले 15 दिनों में बंद कर देना होगा। जिसका मतलब साफ है कि 4 सितम्बर तक मैकडॉनल्ड्स के नाम से रेस्त्रां कनॉट प्लाजा को बंद करने होंगे।

मैकडॉनल्ड्स के हैं 130 देशों में 32 हजार से भी ज्यादा रेस्त्रां

आपको बता दें कि मैकडॉनल्ड्स के 130 देशों में 32 हजार से भी ज्यादा रेस्त्रां है जहां हर रोज औसतन 5.8 करोड़ लोग आते हैं। 70 फीसदी से भी ज्यादा रेस्त्रां फ्रेंचाइजी म़ॉडल पर आधारित हैं, यानी स्थानीय उद्यमी उन्हे चलाते हैं। भारत में भी मैकडॉनल्ड्स के 300 रेस्त्रां हैं। उत्तर और पूर्वी भारत में 169 रेस्त्रां चलाने की जिम्मेदारी कनॉट प्लाजा रेस्त्रां के पास थी जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत में फ्रेंचाइजी करार हार्डकैशल रेस्त्रां के पास है। ताजा बयान में इस फ्रेंचाइजी को लेकर कोई जिक्र नहीं है, यानी मुंबई, वगैरह में मैकडॉनल्ड्स के शौकिनों को चिंता करने की कोई जरुरत नहीं।

मैकडॉनल्ड्स ने करार की शर्तो का उल्लंघन का लगाया आरोप

कनॉट प्लाजा के साथ फ्रेंचाइजी रद्द करने के पीछे मैकडॉनल्ड्स का आरोप है कि करार की शर्तो का उल्लंघन हुआ. साथ ही इसे सुधारने के लिए पर्याप्त समय भी दिया गया है, लेकिन भारतीय कंपनी ने कुछ भी नहीं किया. फिलहाल, मैकडॉनल्ड्स मानती है कि ताजा घटनाक्रम से कई कर्माचारियों के लिए अनिश्चितता की स्थिति बनेगी. फिलहाल, कोशिश यही है कि करार रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया पर अमल के साथ सीआरपीएल के कर्मचारियों, सामान उपलब्ध कराने और स्टोर बिल्डिंग के मालिकों पर असर को प्राथमिकता के आधार पर कम हो। मैकडॉनल्ड्स का यह भी कहना है कि अंतिम समाधान तक पहुंचने में समय लगेगा, लेकिन पूर्व और उत्तर भारत के लिए वो पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. इसी के साथ कंपनी ने यह ऐलान भी किया है कि वो नए पार्टनर ढूंढ़ने की प्रक्रिया शुरू कर रही है।

कनॉट प्लाजा रेस्त्रां का पक्ष

कनॉट प्लाजा रेस्त्रां ने मैकडॉनल्ड्स के इस कदम को हताशा भरा कदम बताया है. साथ ही कंपनी का कहा है, ‘संप्रभु भारत की कानून व्यवस्था का निरादार है. यह कदम नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के फैसले को चुनौती है.’ एनसीएलटी ने सीपीआरएल के प्रंबध निदेशक विक्रम बख्शी को बहाल करने का निर्देश दिया था।

सूत्रों की मानें तो 22 साल तक प्रबंध निदेशक रहने के बाद बख्शी को मैकडॉनल्ड्स के कहने पर ही हटाया गया और जिसके बाद इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई. सीपीआरएल का दावा है कि एनसीएलटी ने अपने फैसले में मैकडॉनल्ड्स की कार्रवाई को गैरकानूनी, अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण बताया था.

कनॉट प्लाजा रेस्टोरेंट्स और मैकडॉनल्ड्

सीपीआरएल ने फ्रेंचाइजी करार रद्द करने के नोटिस के समय पर सवाल उठाया है. यह नोटिस उस दिन जारी किया गया है जिस दिन कंपनी के डायरेक्टर बोर्ड की बैठक तय की गयी थी। इस बैठक में मैकडॉनल्ड्स के दो नामित डॉयरेक्टर्स को भी शामिल होना था। इस बैठक के ऐजेंडों में 43 बंद पड़े रेस्त्रां को खोले जाने पर भी विचार किया जाना था। फिलहाल, सीपीआरएल ने साफ किया है कि वो तमाम कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।इसका यह मतलब है कि जब तक विवाद नहीं सुलझता है या फिर पार्टनर नहीं आ जाता है, तब तक दिल्ली समेत 12 राज्यो में मैक डी के बर्गर खाने के लिए इंतजार करना होगा।