नैनीझील को सूखने से बचाने के लिए सरकार ने किए ये उपाय..

नैनीताल(अमित शर्मा)।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने नैनीझील के गिरते जल स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि नैनीझील को कतई सूखने नहीं दिया जायेगा। उन्होंने प्रशासन अकादमी नैनीताल में अधिकारियों एवं पर्यावरणविदों के साथ बैठक करते हुये सुझाव लिये और मुख्य अभियंता सिंचाई डीके पचैरी को निर्देश दिये कि वे शहर में अवैध रूप से वर्षा जल को सीवरेज में डालने वालों को चिन्हित कर कड़ी कार्यवाही करें। साथ ही वर्षाजल को झील में लाने हेतु नालियों की सफाई करायें व नई नालियों के निर्माण हेतु आंगणन प्रस्तुत करें।


मुख्य सचिव श्री सिंह ने नैनीझील के संरक्षण एवं जलस्तर को बनाये रखने हेतु सूखाताल झील कैचमेंट एरिया से अतिक्रमण हटाया जायेगा साथ ही अवैध निर्माण पर पूर्ण रोक लगाई जायेगी, जिससे वर्षाकाल में सूखाताल झील से पानी नैनीझील में आ सके। उन्होंने कहा कि नैनीझील के कैचमेंट एरिया ग्रीन बैल्ट में निर्माण कतई होने नहीं दिया जायेगा व कैचमेंट एरिया में जल स्रोतों के संरक्षण हेतु वन विभाग द्वारा वृहद पौधा रोपण कराया जायेगा। उन्होंने जिलाधिकारी को निर्देश दिये कि शहर के जिन घरों का पानी सीवरेज में जाता है उनपर अभियान चलाकर कार्यवाही करें तथा वर्षा जल को नालियों द्वारा नैनीझील में लाया जाय।
बैठक में मुख्य सचिव ने अमृत योजनान्तर्गत झील संरक्षण कार्यो की समीक्षा के दौेरान पाया कि शहरी विकास में नगरपालिका का 7.27 करोड़ की धनराशि अवमुक्त होनी है। उन्होंने आयुक्त कुमाऊ मण्डल चन्द्रशेखर भट्ट से कहा कि वे इस संबंध में अपनी ओर से शासन को पत्र प्रेषित करें ताकि वांछित धनराशि अवमुक्त हो सके। उन्होंने जिलाधिकारी दीपेन्द्र कुमार चैधरी से कहा कि वह सिंचाई, जलनिगम, जलसंस्थान, लोक निर्माण, नगरपालिका द्वारा किये गये झील संरक्षण के कार्यो की समय-समय पर समीक्षा एवं मूल्यांकन करंे। उन्होंने कहा कि झील हमारी प्राथमिकता है तथा इसको बचाना हमसबका नैतिक दायित्व है।
बैठक में पर्यावरणविद डा0 अजय रावत ने सुझाव ने कहा कि नैनीझील को बचाने हेतु सूखाताल झील एवं उसके कैचमेंट एरिया को पुर्नजीवित करना होगा। विलुप्त एवं बंद नालियों को खोलना होगा जिससे सूखाताल झील में पानी का रूकाव हो सके व धीरे-धीरे रिस कर नैनीझील में लगातार आये। उन्होंने कहा कि नैनीताल के ग्रीन बैल्ट एरिया के साथ ही शहर में गु्रप हाउसिंग एवं बहुमंजिला भवनों के निर्माण पर पूर्ण रोक लगायी जाय। साथ ही नैनीताल में सीसी सड़क निर्माण कार्य बंद करने होंगे ताकि वर्षा जल जमीन के भीतर होते हुये नैनीझील में आ सके। उन्होंने बताया कि नेैनीताल में पूर्व में 30 जलश्रोत चिन्हित थे जो अब मात्र 08 रह गये हैं जिनमें निर्माण कार्यो के कारण पानी की कमी हुयी है।
अपने सुझाव रखते हुये प्रो0 जीएल साह तथा होटल एसोसियेशन के अध्यक्ष दिनेश साह ने कहा कि नैनीताल शहर के लगभग सभी भवनों के छतों का वर्षा पानी सीवरेज से होते हुये शहर से बाहर चला जाता है व वर्षाकाल में आये दिन सीवरेज ओवरफ्लो होती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी घरों का वर्षा के पानी को नालियो द्वारा नैनीझील मंे लाया जाय जिससे नैनीझील का 20 प्रतिशत जलस्तर बढ़ेगा।
बैठक मंे निदेशक एटीआई एएस नयाल, मुख्य अभियंता लोक निर्माण बीसी बिनवाल, मुख्य विकास अधिकारी प्रकाश चन्द्र,प्रभागीय वनाधिकारी डीएस मीणा, अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण डीएस नबियाल, अधिशासी अभियंता डीएस कुटियाल, अधीक्षण अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग अय्याज अहमद, अधिशासी अभियंता महेन्द्र कुमार, अधिशासी अभियंता जलसंस्थान एचके पांडे, ईओ रोहिताश शर्मा के अलावा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।