तो पाकिस्तान के कितने संस्थानों में महात्मा गांधी की तस्वीर लगी है? एएमयू में जिन्ना की तस्वीर का मामला।

-एएमयू में जिन्ना की तस्वीर का मामला।
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अलीगठ।
यूपी के अलीगढ़ मुस्मि यूनिवर्सिटी के प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि छात्र संघ भवन में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की जोर तस्वीर लगी है उसे नहीं हटाया जाएगा। अलीगढ़ के सांसद गौतम ने जिन्ना की तस्वीर हटाने की मांग को लेकर यूनिवर्सिटी के वीसी को पत्र लिखा था। एएमयू का माहौल किसी से भी छिपा नहीं है। सांसद तो क्या देश के पीएम भी चाहे तो जिन्ना की तस्वीर नहीं हट सकते हंै। सवाल जिन्ना की तस्वीर का नहीं है। अहम सवाल यह है कि पाकिस्तान के कितने संस्थानों में महात्मा गांधी की तस्वीर लगी हुई है? जबकि देश की आजादी के समय महात्मा गांधी का झुकाव जिन्ना के प्रति ज्यादा था। इतिहासकारों के अनुसार महात्मा गांधी नहीं चाहते थे कि भारत का विभाजन हो। विभाजन को रोकने के लिए महात्मा गांधी ने जवाहरलाल नेहरू के बजाए मोहम्मद अली जिन्ना को प्रधानमंत्री बनाने का भी प्रस्ताव रख दिया था। लेकिन इसके बाद भी जिन्ना विभाजन पर अड़े रहे और पाकिस्तान नाम के देश को जन्म दिया। लेकिन फिर भी महात्मा गांधी ने घोषणा की कि मुसलमान भाई भारत में अपने धर्म के अनुरूप रह सकते हैं। हालांकि जिन्ना ने तो मुसलमानों के लिए पाकिस्तान बनवा दिया था। इसे महात्मा गांधी की संवेदनशीलता और भाईचारा ही कहा जाएगा कि भारत को धर्म निरपेक्ष राष्ट्र घोषित करवा दिया। यही वजह है कि जितने मुसलमान पाकिस्तान में है उतने ही वर्तमान में भारत में रहे रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी पाकिस्तान में कहीं भी महत्मा गांधी की तस्वीर नहीं होगी। महात्मा गांधी ने पाकिस्तान के नवनिर्माण के लिए उस समय करोड़ों रुपए की आर्थिक मदद भी दिलवाई। शेष भारत में भले ही साम्प्रदायिकता की आग लगी हो, लेकिन महात्मा गांधी ने पाकिस्तान और जिन्ना की मदद करने में कोई कमी नहीं रखी। कायदे से तो पाकिस्तान में जिन्ना से भी ज्यादा प्रतिमाएं और तस्वीरें महात्मा गांधी की होनी चाहिए, क्योंकि भारतीयों की कीमत पर पाकिस्तान को खड़ा किया। जिस जिन्ना की वजह से देश का विभाजन हुआ, उसी की तस्वीर बड़ी शान से एएमयू में लगाई गई है। आज हम पाकिस्तान के हालात देख रहे हैं। चारों तरफ आतंकवाद और कद्दावर फैला हुआ है। जिन्ना ने उम्मीद जताई थी कि पाकिस्तान बनने से मुसलमान सुकून के साथ रहेगा, लेकिन पूरी दुनिया देख रही है कि पाकिस्तान में मुसलमानों का क्या हाल है। आए दिन बम फट रहे हैं तो आईएएस जैसे संगठन अपने ही मुसलमानों को मौत के घाट उतार रहे हैं। वहीं भारत में रहने वाला मुसलमान बेहतर स्थिति में है। सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सूफीवाद के सिद्धांतों पर चले हिन्दू-मुसलमान भाई चारे के साथ भी रह रहा है। जबकि पाकिस्तान में तो हिन्दुओं को रहने ही नहीं दिया जाता। इतना ही नहीं पाकिस्तान के आतंकियों की मदद से हमारे कश्मीर में ही चार लाख हिन्दुओं को पीट पीट कर भगा दिया गया है। आज पूरी घाटी हिन्दू विहीन हो गई है।
साभार-एस.पी.मित्तल