देसंविवि के प्रो. चतुर्वेदी राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए नामित

हरिद्वार।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा विभाग के प्रमुख प्रो. राधेश्याम चतुर्वेदी को संस्कृत भाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार हेतु चयनित किया गया है। सन् 2017 के लिए उनका चयन मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा बनाई गयी विशिष्ट समिति ने किया है। यह पुरस्कार उन विद्वानों को दिया जाता है, जिन्होंने संस्कृत, पाली आदि भाषाओं के प्रचार-प्रसार, साहित्य आदि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया हो। प्रो. चतुर्वेदी का चयन तंत्र शास्त्र के तंत्रलोक, महाकाल संहिता, शक्तिसंगम तंत्र आदि ग्रंथों पर की गयी टीका के लिए हुआ है। देसंविवि के संस्कृत एवं वेदाध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. चतुर्वेदी संस्कृत वांगमय की विभिन्न विधाओं एवं आगम शास्त्र के विशेषज्ञ हैं। संस्कृत व हिन्दी में 23 से अधिक पुस्तकों के लेखक प्रो. चतुर्वेदी यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले उत्तराखण्ड के एकमात्र विद्वान हैं।

उनके राष्ट्रपति पुरस्कार हेतु चयनित होने पर देसंविवि परिवार ने उन्हें बधाइयाँ दी हैं। अपनी शुभकामनाएँ देते हुए कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि उनकी इस उपलब्धि पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय ही नहीं, अपितु देवभूमि उत्तराखण्ड भी गौरवान्वित है। प्राचीन विद्याओं पर शोधात्मक दृष्टि से कार्य करना देसंविवि का प्रमुख आधार है। देसंविवि के प्रतिकुलपति ने कहा कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय पूज्य गुरुदेव पं.श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा स्थापित भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के कार्य को करने के लिए कृत संकल्पित है। प्रो. चतुर्वेदी को मिलने वाला यह पुरस्कार इसी उद्देश्य को प्राप्ति हेतु एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।