संहिता के दौरान ही कर दिया टेन्डर, जाने बोर्ड गठन से पहले टेण्डर करने की क्या थी जल्दबाजी

हरिद्वार।
आचार संहिता के बावजूद  गंगा जी के 72 घाटों की साफ सफाई का 15.34 करोड का टैण्डर किये जाने की जल्दबाजी में कर दिया जिनके रख रखाव ओर साफ सफाई की जिम्मेदारी उन घाटो के निर्माणकर्ता धार्मिक संस्थाओं का है। rti कार्यकर्ता रमेशचंद्र शर्मा ने यह शिकायत मुख्यमंत्री और मुख्यसचिव को पत्र के माध्यम से की है। पत्र में आचार संहिता के दौरान नगर निगम में किये जा रहे टैण्डर की जांच की भी मांग की गई है।
नगर निकाय चुनाव के चलते प्रदेश में आचार संहिता लगाई गई है। आचार संहिता लगे होेने बावजूद सरकारी प्रक्रिया के तहत टैण्डर किये जाने का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय सुचना अधिकार जागृति मिशन के अध्यक्ष रमेशचन्द्र शर्मा ने बताया कि नगर निगम प्रशासक जो आचार संहिता के तहत जिलानिर्वाचन अधिकारी के संवैधानिक पद पर नामित है उनके द्वारा आचार संहिता के दौरान 15.34 करोड रुपये का टैण्डर निकालने की संस्तुती की जानी है। जबकी पांच दिन बाद ही महानगर की आम जनता द्वारा लोकतांत्रिक व्यवस्था से जनप्रिय बोर्ड चुन कर आना था। तब नगर निगम प्रशासक एवं नगर निगम आयुक्त ने किस भाजपा नेता के प्रभावशाली दबाव में राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त से उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देकर आनन फानन में 15.34 करोड रुपये का टेण्डर निकालने की अनुमति के लिए जल्दबाजी कराई थी। बताया कि जिन घाटों पर झाडू लगाने का कार्य किसी चहेती कम्पनी को टैण्डर द्वारा दिया जा रहा है। उन घाटों की उचित सफाई व्यवस्था उनके निर्माणकर्ता सामाजिक धार्मिक संस्थाओं द्वारा अति उत्तम नित्य किया जा रहा था। उन घाटो पर झाडू लगाने के नाम पर करोडो रुपयों का उपव्यय किसके इशारे पर किया जा रहा है। रमेशचन्द्र शर्मा ने मांग की है कि 15.34 करोड रुपयों से महानगर के गन्दगी से अटे पडे अनेको नालों की सफाई उनकी मरम्मत तथा गंगा में गिर रहे गन्दे नालों की गंदगी को रोक कर गंगा को प्रदूषण से स्थाई रुप से मुक्त कराने की योजना देहरादून रिवरफ्रंट की तर्ज पर चलाई जाए। अधिकारियों द्वारा जानकारी लेने पर बताया गया कि टैण्डर पूर्व में किया जा चुका है अब री-टैण्डर प्रक्रिया के लिए निर्वाचन आयोग से अनुमति ली जा चुकी है।