प्राईवेट स्कूलो द्वारा मांगी जा रही फीस पर मुख्य सचिव को भेजा नोटिस

हरिद्वार।
रूल ऑफ लॉ एंड जस्टिस फाउंडेशन के अधिक्षक अधिवक्ता अरविन्द श्रीवास्तव द्वारा उत्तराखंड सरकार के मुख्य सचिव उत्तराखंड जिला अधिकारी हरिद्वार एवं जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस दिया है। जिसमें बताया कि वर्तमान में कोविड-19 महावारी के चलते पूरे देश में लॉक डाउन घोषित किया गया है, जो अभी 3 मई तक प्रभावी है जिसके आगे बढ$ने की प्रबल संभावना है। आवश्यक वस्तु को छोड$कर सभी कार्य बंद है। सरकार द्वारा समय—समय पर देश की जनता के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जा रहे हैं, जिसमें बैंक के लिए लोन की किस्त को भी आगे बढ$ाया गया है। कई राज्यों की सरकारों द्वारा प्राइवेट स्कूल को स्पष्ट आदेश फीस न लेने का सिर्फ ट्यूशन फीस लेने का आदेश पारित किए गए हैं। अधिकतर अभिभावक व्यवसाय करते हैं, नौकरी या खेती करते है, तीनों ही जगह सभी को बेहद मार पड$ रही है। सरकारी नौकरी वालों को थोड$ी तसल्ली हो सकती है परंतु अन्य को प्राइवेट कंपनियों के साथ अगले महीने से समस्याएं आने की खबर शुरू हो गई तथा सरकारी नौकरी में महंगाई भत्ता भी रोका गया है। किसानों की फसल पर कोरोना वायरस के साथ—साथ मौसम बरसात ने भी कहर ढाया है। जिससे बहुत समस्याएं सामने खड$ी हो चुकी हैं। आवश्यक वस्तुआें को छोड$कर व्यापार बिल्कुल बंद हो चुका है बताया कि इन अस्सी नब्बे प्रतिशत मध्यमवर्गीय परिवारों की आर्थिक स्थिति वर्तमान में बेहद चिंताजनक होने के बाद भी अन्य जरूरतमंद लोगों का सहयोग भी कर रहे हैं। सरकार को भी सहयोग कर रहे हैं जो लोग किराए पर निर्भर है तो वह किराया नहीं ले रहे और व्यापार है तो व्यापार बंद है। किसी विधि व्यवसाय से जुड$ा है उसका कार्य पूर्णता बंद है। सीधी वादे की अधिकांश कार्य इस प्रकार के हैं कि इस महामारी के बाद जब सब कुछ खुलेगा तब भी उसका नुकसान पूरा नहीं कर पाएंगे, और उसके लिए रुका हुआ भुगतान भी नहीं मिलने वाला। प्राइवेट स्कूल द्वारा अगले सत्र की पढ$ाई इंटरनेट के माध्यम से कराई जा रही है तथा बच्चों को फोन में देख कर कार्य करना पड$ता है। जिससे बच्चों की आंखें कमजोर होने का खतरा बढ$ गया है। इसके अतिरिक्त बच्चों को जो समझ नहीं आता उसे समझने का भी कोई उपाय नहीं है इंटरनेट पर पढ$ाई करना आरंभ करने के बाद से ही स्कूल द्वारा अभिभावकों से इसकी मांग कर परेशान किया जाने लगा। जिसका संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री की आेर से निर्देश दिया गया कि सभी स्कूल फीस ले सकते हैं तथा जो अभिभावक फीस दे सकते हैं। वह स्कूलों को फीस दें उन्होंने सिर्फ इतना सहयोग करने को कहा कि यदि कोई अभिभावक फीस नहीं दे पा रहा तो स्कूल उसे परेशान नहीं करेगा और बच्चे का नाम नहीं कटेगा। लेकिन स्कूल द्वारा ऑनलाइन होमवर्क भेज कर इतिश्री की जा रही। फि र छात्रो को समझ में आए या न आए इसका कोई उपाय नहीं है। प्राइवेट स्कूलों द्वारा जो ऑनलाइन बच्चों को कार्य दिया जा रहा है उसमें उनका नाम मात्र का खर्च आ रहा है। इस स्थिति में स्कूल के अनेकों खर्चे नहीं हो रहे जैसे बिजली का बिल, लैब खर्च, कंप्यूटर खर्च, रिपेयर, पानी, जनरेटर, सेनेटरी, स्टेशनरी, स्पोर्ट्स, बस/ ट्रांसपोर्ट व अन्य स्कूलों के खर्चे में नहीं जुड$ रहे। स्कूलों के खर्चे में जो जोड$ता है, शिक्षकों की सैलरी बैंक लोन यदि उसे स्कूल द्वारा ले लिया हो गया हो तो लोन की किस्त आगे बढ$ा दी गई है। अन्य कर्मचारियों की सैलरी भारत में परंपरागत रूप से सरकारी शैक्षिक संस्थान और निजी शिक्षक संस्थान गैर मुनाफे के दायरे में रही हैं। यह इस सिद्धांत पर आधारित है कि शैक्षिक संस्थान का मूल उद्देश्य शिक्षित करना है ना कि लाभ कमाना तथा शैक्षिक संस्थान को शिक्षा और छात्रों के विकास गतिविधियों पर 7 से 8प्रतिशत खर्च करना होता है। जो इस कोरोना महामारी के समय में ना के बराबर है। इस परिस्थिति में स्कूल प्रबंधन जिस प्रकार का रोना रो रहे हैं कि उनके खर्च जो इस समय ना के बराबर हैं कहां से पूरे होंगे वह सिर्फ ट्यूशन फीस वह भी पूरे हो सकते हैं। जबकि नागरिक समस्याआें का बोझ लेकर एक-दूसरे को सहयोग कर समय को निकाल रहे हैं। उस परिस्थिति में यह स्कूल प्रबंधन सिर्फ अपना व्यापार क्यों देख रहे हैं तथा इस स्थिति में स्कूल प्रबंधन सिर्फ ट्यूशन फीस लेकर अभिभावकों व सरकार को सहयोग कर सकती है। लॉक डाउन में कोई स्कूल नहीं खुल रहा अभी तक यह उम्मीद भी नहीं कि कम से कम अगले तीन—चार महीने तक स्कूल खुलेंगे। उत्तराखंड राज्य में संचालित सभी गैर सरकारी स्कूल राज्य सरकार के अधीन हैं जिस कारण नोटिस पूर्ण अधिकार उत्तराखंड में संचालित गैर सरकारी स्कूल को वैश्विक महामारी के समय में अभिभावकों से स्कूल फीस में लेने का आदेश पारित करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। नोटिस द्वारा सूचित किया जाता है कि नोटिस मिलने के 6 दिन उत्तराखंड राज्य में संचालित गैर सरकारी स्कूल को वैश्विक महामारी के समय में अभिभावकों से स्कूल फीस में लेने का आदेश पारित कर दें।
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