लॉक डाउन से डिप्रेशन में आये उडीसा के इंजीनियर को सकुशल घर भेजा -पागलों की तरह सड$कों पर धूमता रहा सॉफ्टवेयर इंजीनियर

लॉक डाउन से डिप्रेशन में आये उडीसा के इंजीनियर को सकुशल घर भेजा
-पागलों की तरह सड$कों पर धूमता रहा सॉफ्टवेयर इंजीनियर
-स्थानीय युवक अनुराग ने दिया मानवता का परिचय, दोस्त की तरह रखा ध्यान
फोटो—1/सुदबुध खोये पागलों की तरह रह रहा सॉफ्टवेयर इंजीनियर।
हरिद्वार।
पिछले दो माह से लॉकडाउन में फंसा उड$ीसा का सॉफ्रटवेयर इंजिनियर आज अपने भाई के साथ वापस घर लौट गया। लॉक डाउन से पूर्व उत्तराखंड घुमने आये सॉफ्टवेयर इंजीनियर पागलों की तरह सुध—बुध खोकर सडक़ पर बैठा हुआ था। हाव—भाव से पागल सा दिखाने वाला युवक पढ़ा लिखा अच्छे परिवार से दिख रहा था। जिसकी मदद रेलवे रोड$ स्थित एक खाने का होटल चलाने वाला युवक ने क ी। जिसकी सूचना पर पुलिस हरकत में आयी और युवक की मदद करने का प्रयास किया। लेकिन वह पुलिस के साथ जाने को तैयार नहीं हुआ, जिस कारण पुलिस ने होटल संचालक पर उसकी देखभाल का जिम्मा सौप कर उसके परिजनों की तलाश शुरू की गयी। परिजनों की तलाश में भी होटल संचालक ने अहम भूमिका निभाते हुए उसके भाई को खोज निकाला और मामले की जानकारी दी। जिसके बाद सोफ्रटवेयर इंजिनियर का भाई हरिद्वार पहुंचा, जिसने पुलिस और होटल संचालक का आभार जताते हुए अपने भाई को साथ ले गया।
जानकारी के अनुसार सम्भलपुर उड$ीसा निवासी के भवानी शंकर पात्रा (3२ वर्ष) जो कि बैंगलोर की किसी कम्पनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर तैनात है। लॉकडाउन से पूर्व वह अकेला उत्तराखण्ड धुमने के लिए आया था। जो कि अचानक देश के भीतर लॉक डाउन हो जाने पर वह हरिद्वार में फंस गया। बताया जा रहा हैं कि रेलवे रोड$ स्थित किसी होटल में ठहरा था। लेकिन पैसा खत्म होने के कारण व एक सोफ्रटवेयर इंजिनियर होने के नाते उसने किसी से मदद लेना गवारां नहीं समझा। जिसने होटल से कमरा छोड दिया और रेलवे रोड$ के पास ही धुमते हुए लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार करने लगा। बताया जा रहा हैं कि सड$क पर रहने के कारण उसका सारा सामन भी उठाईगिरों ने साफ कर दिया। ज्यों ज्यों लॉकडाउन का समय सीमा बढती गयी, वैसे वैसे सोफ्रटवेयर इंजीनियर की बेचनी भी बढती गयी। जो कुछ भी उसके पास था सब पैसा खत्म हो गया। जिस कारण वह डिप्रेशन में आ गया। बताया जा रहा हैं कि युवक की स्थिति को देखकर रेलवे रोड$ स्थित अमित भोजनालय स्वामी अनुराग को उसकी स्थिति देखी नहीं गयी और उसने अपने घर से रोजना सुबह-शाम खाना देता रहा। जिसपर सुधबुध खोये सोफ्रटवेयर इंजिनियर को अनुराग अपना मित्र लगा और उस पर विश्वास करने लगा। अनुराग ने युवक से उसके परिवार की जानकारी ली तो उसने अपने को उड$ीसा और भाई का नाम के गोवर्धन पात्रा बताया। फेसबुक पर सर्च किया गया। जिसमें के गोवर्धन नाम के कई व्यक्ति समाने आये। जिनके फोटो युवक को दिखाया गया। जिसने एक फोटो को देखकर अपना भाई होने की तस्दीक की। जिस पर अनुराग ने उस फेसबुक पर मैसेज भेजा गया, लेकिन एक सप्ताह तक मैसेज नहीं पढ$ा गया। जिसके बाद फेसबुक पर ही अनुराग ने के गोवर्धन पात्रा की कम्पनी कोल इण्डिया लिमिटेड का नम्बर भी लिखा देखा और कॉल कर मामले की जानकारी दी गयी। इसी दौरान अनुुराग ने सीआे सिटी अभय प्रताप सिंह से सम्पर्क कर मामले से अवगत कराया गया। जब पुलिस युवक को लेेने पहुंची तो उसने साथ जाने से इंकार कर दिया। और ना ही पुलिस से कोई बात की गयी। जिस पर सीआे सिटी अभय प्रताप सिंह ने युवक की देखभाल का जिम्मा अनुराग पर छोड कर उसकी हर स्थिति की उनको जानकारी देने को कहा गया। बताया जा रहा हैं कि के गोवर्धन पात्रा का फोन कॉल अनुराग के पास आने पर उसके भाई के भवानी शंकर पात्रा से वीडियों कॉलिंग करायी गयी। जिसको देखकर दोनों ने एक दूसरे को पहचान लिया और दोनों ही भावुक हो गये। जिस पर के गोवर्धन पात्रा ने अनुराग को शीघ्र हरिद्वार पहुंचने का अश्वासन दिया। बताया जा रहा हैं जिस कम्पनी में के भंवानी शंकर पात्रा सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, वहां उसका वेतन लाखों में है। वही उसको भाई के गोवर्धन पात्रा भी कोल इण्डिया लि.में असिस्टेंड मैनेजर के पद पर तैनात है। के भंवानी शंकर पात्रा के भाई की खोज हो जाने की जानकारी अनुराग ने सीआे सिटी को दी। जिस पर सीआे सिटी अभय प्रताप सिंह ने युवक को घर भिजवाने की पूरी औपचारिकता पूर्ण करते हुए उसके भाई के आने का इंतजार किया। सॉफ्टवेयर इंजिनियर का भाई आज हरिद्वार पहुंचा, जहां पर सीआे सिटी अभय प्रताप सिंह ने सिटी मजिस्ट्रेट से उड$ीसा तक जाने की अनुमति दिलाकर उसको हरिद्वार से रवाना किया। सीआे सिटी अभय प्रताप सिंह के अनुसार पिछले दो माह से लॉक डाऊन में फंसे उड$ीसा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर को उसके भाई के साथ वापस भेज दिया। इंजीनियर के भाई के गोवद्र्धन पात्रा ने हरिद्वार पुलिस व खास तौर पर अनुराग शर्मा का तहे दिल के शुक्रिया अदा किया।
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