हरिद्वार एक नज़र

शांतिकुंज के डॉक्टर व पत्नि के खिलाफ कोतवाली नगर में मामला दर्ज

हरिद्वार।
शाहदरा दिल्ली के थाना विवेक विहार में चार दिन पूर्व छत्तीसगढ की युवती ने हरिद्वार की धर्मिक संस्था शांतिकुंज के प्रमुख और उनकी पत्नी पर पर दस साल पूर्व दुष्कर्म किये जाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। दिल्ली पुलिस ने पीडिता की शिकायत पर जीरो पर मुकदमा दर्ज कर हरिद्वार कोतवाली नगर में स्थान्तरित कर दिया। कोतवाली नगर पुलिस ने सम्बंधित धराआें में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दिया है। दुष्कर्म मामले में एसएसपी द्वारा सीआे सदर के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गयी है।
गौरतलब है कि चार दिन पूर्व छत्तीसगढ की एक युवती ने शाहदरा दिल्ली के थाना विवेक विहार में तहरीर देते हुए आरोप लगाया था कि हरिद्वार की प्रमुख धर्मिक संस्था शांतिकुंज के डॉक्टर द्वारा उसके साथ वर्ष 2१0 में दुष्कर्म किया था। उस वक्त वह 14 साल की थी, डॉक्टर द्वारा लगातर चार वर्षो तक उसके साथ दुष्कर्म किया जाता रहा। जिसकी शिकायत उसके द्वारा उनकी पत्नी से भी कई बार की गयी, लेकिन उन्होंने भी उसको डरा धमका कर चुप रहने के लिए धमकी दी गयी। पीडिता ने तहरीर में कहा गया हैं कि उसके गांव के एक शांतिकुंज के कार्यकत्र्ता द्वारा उसको संस्था में भोजन की व्यवस्था, उसकी शिक्षा सहित शादी कराने की बात कहते हुए हरिद्वार लाया गया था। जहां पर उसके साथ डॉक्टर द्वारा अपने कमरे में कॉफी देने पहुंचने पर कई बार दुष्कर्म किया गया। चूंकि मामला उत्तराखण्ड के हरिद्वार से जुड$ा था, इसलिए दिल्ली पुलिस ने पीडिता की तहरीर पर मुकदमा जीरो पर दर्ज कर सम्बंधित कोतवाली नगर को स्थान्तरित कर दिया है। इस मामले पर एसएसपी सेथिंल अबुदेई कृष्णराज एस द्वारा सीआे सदर डा. पूर्णिमा गर्ग के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की गयी है। जिसमें जांच अधिकारी महिला हैल्प लाईन प्रभारी मीना आर्य को बनाया गया है। वहीं टीम में सहयोग के लिए ज्वालापुर प्रभारी निरीक्षक योगेश सिंह देव को भी शामिल किया गया है। मामला हाईप्रोपफाइल होने के कारण पुलिस के आलाधिकारी भी प्रकरण को गम्भीरता से ले रहे है। कोतवाली नगर प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कोश्यारी के अनुसार दिल्ली से स्थान्तरित होकर पहुंची जीरो एफआईआर को सम्बंधित धराआें में दर्ज कर लिया गया है।
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समाजसेवी हरिराम ने की वापस लौट रहे श्रमिकों की सहायता की मांग
हरिद्वार।
सेवा समिति के पूर्व अध्यक्ष हरिराम कुमार ने सरकार एवं स्वयंसेवी संगठनों से मांग की है कि सड$कों तथा रेलवे लाइनों के रास्ते पैदल ही अपने घरों को जा रहे श्रमिकों को वाहन और भोजन उपलब्ध कराकर सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाए। उन्होंने संपूर्ण भारतीय जनमानस से अपील की है कि भारतीय संस्कृति एवं संवेदनाआें को जीवंत कर भूख प्यास से सड$कों पर तड$प— तड$प कर दम तोड$ रही मानवता की उदार हृदय से सहायता करें।
पूर्व सभासद सीनियर सिटीजन हरिराम कुमार ने महाराष्ट्र के रेल हादसे मे हुई सोलह मजदूरो की हत्या पर देश और समाज की बदतर हो चुकी हालत पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि लॉकडाउन की लंबी अवधि तक इंतजार करने के बाद जब श्रमिकों के पास धन समाप्त हो गया और उन्हें भोजन देने वाला कोई नजर नहीं आया तो उन्होंने सरकार, प्रशासन एवं उन संस्थाआें से अनुनय विनय किया जिनमें वे अपनी सेवाएं दे रहे थे। जब कहीं से कोई सहारा नहीं मिला तो बेचारे पैदल ही अपने प्रदेशों की आेर निकल पड$े। लेकिन हद तो तब हो गई जब पुलिस वालों ने उन पर लाठियां भांजी और सरकारी तंत्र ने उन्हें यह कहकर वापस कर दिया कि जो जहां है वहीं रहेगा। फिर भी घर पहुंचने की चाहत से ये मेहनतकश संतानें स्वयं को रोक नहीं सके। सड$क मार्ग की अनभिज्ञता में कुछ ने जब रेलवे लाइन का रास्ता पकड$ा तो उन्हें स्टेशन पर रोका गया कुछ रेलों से कटकर जान गवां बैठे तो कुछ साइकिल, रिक्शा और पैदल ही आज भी सड$कों पर हैं। देश और समाज से समाप्त हो चुकी संवेदनाआें पर चिंता व्यक्त करते हुए वयोवृद्ध समाजसेवी हरिराम कुमार ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र में जनता के हित सर्वोपरि होते हैं। लेकिन वर्तमान भारत के हालात एेसे हो गए हैं कि सड$कों और रेलवे लाइनों पर भटकते श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए कोई व्यक्ति या संस्था सामने नहीं आ रही है। जिन धर्म गुरुआें को समाज धर्म और समाज की रक्षा के लिए दान देता है वे संत भी अब असहायों की सेवा न कर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री राहत कोष में धन देकर अखबार और चैनलों की सुर्खियां बटोर रहे हैं। क्या इन स्वयंसेवी संगठन तथा संतों के हृदय में मेहनतकशों के प्रति संवेदना नहीं है। देश की सड$कों एवं रेलवे लाइनों पर भूखे प्यासे पैदल ही सफर कर रहे श्रमिकों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए उन्होंने आम जनता से प्रार्थना की है कि अपने—अपने क्षेत्रों में जहां भी पैदल यात्री मिलें। उनको भोजन पानी देने के बाद गंतव्य तक पहुंचाने में यथासंभव मदद करें। जो श्रमिक अपने पसीने से देश की सेवा करते हैं वे हमारे भाई हैं उन्हें कोरोना संवाहक न समझें और यथासंभव सहायता कर मानवता के जीवित होने का प्रमाण दें।
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हरिद्वार।
पंचपुरी हलवाई समाज कल्याण समिति के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताआें ने राज्य सरकार से दुकानें खोले जाने की अनुमति दिए जाने की मांग की है। समिति के अध्यक्ष धामसिंह बिष्ट ने कहा कि लॉकडाउन के चलते दुकानें बंद होने से मिठाई आदि बनाने वाले कारीगरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड$ रहा है। उन्होंने कहा कि पंचपुरी हरिद्वार में मिठाई की सैकड$ों दुकानें हैंं। जिन पर मिठाई बनाने वाले कारीगर काम कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। लंबे समय से दुकानें बंद रहने से खाली बैठे कारीगरों के सामने परिवार के लिए भोजन तक जुटाना मुश्किल हो रहा है। संरक्षक अधीर कौशिक ने समिति की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि लॉकडाउन के कारण विवाह समारोह व अन्य आयोजन भी नहीं हो पा रहे हैंं। जिसके चलते बड$ी संख्या में कारीगर बेरोजगार हो चले हैंं। डेढ$ महीने से कारीगरों के खाने व अन्य खर्चे उठाए जा रहे हैंं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शराब की दुकानें खोलने की अनुमति तो दी गयी है। इसी तर्ज पर हलवाईयों को भी राहत देते हुए मिठाई की दुकानें व चाट आदि की दुकानें खोलने की अनुमति प्रदान की जाए। पांच से छह घंटे कारीगर काम करेंगे तो उनका खर्च निकल सकेगा। जल्द ही सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को समिति द्वारा ज्ञापन प्रेषित करने पर पूर्ण रूप से सहमति बन गयी है। इस अवसर पर राकेश कुमार, नरेश कुमार, सुरेंद्र कुमार सपरा, उमेश कुमार आदि मौजूद रहे।