खनन वाहन चालको से खतरा महसूस करते लालढांग के नागरिक

लालढांग।
एक तरफ जहां पूरा देश कोरोना जैसी गम्भीर बीमारी से जूझ रहा है तो वही उत्तराखण्ड में भी लगातार कोरोना के मामलों में इजाफा होता जा रहा है। लेकिन इन सब बातों को नजर अंदाज करते हुए कुछ खनन माफिया आम लोगो की जिन्दगी के साथ खिलवाड$ करते नजर आ रहे हैं। ये लोग सभी नियम कानून को ताक में रखकर सिर्फ पैसा कमाने में लगे हुए हैं। बताते चलें कि वर्तमान में पौड़ी जिले के कोटद्वार में खनन कार्य कुछ समय पूर्व चल रहा है। जिनके कुछ खनन के वाहन लालढांग कटेबड स्थित स्टोन क्रशर में आ रहे है। ये आेवर लोड वाहन प्रतिदिन लालढांग बाजार से होकर गुजर रहे हैं। चूँकि यहां बाजार की सडक बहुत संकरी है, जिसके चलते कोई भी हादसा हो सकता है तो वही दूसरी तरफ जब—जब वाहन बाजार के बीच से निकलते हैं तो पुलिस और दुकानदारों के द्वारा बनाये गये घेरो में खड़े लोग दुकानों के अंदर जमा हो जाते हैं। जिससे सोशल डिस्टेंस पूरी तरह समाप्त हो जाता है। वही दूसरी तरफ जिला हरिद्वार में होने के कारण लालढांग भी रेड जोन में आता है, तो खनन के वाहनों को ग्रीन जोन से रेड जोन में किस प्रकार एंट्री मिल रही है तो बाद में रेड जोन में आने के बाद ग्रीन जोन में कैसे प्रवेश कर रहे हैं। ज्यादार वाहन चालको के चेहरों पर मास्क भी नही होता है। जिस कारण कोरोना जैसी गम्भीर बीमारी फैलने का अंदेशा लगातार बना रहता है। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि जिन क्रेशरों में खनन जाता है उन क्रेशरों के आसपास कई वाहन चालकों को एक साथ खड़े होते भी देखा जाता है। जहां से स्थानीय लोगों का आना—जाना भी बना रहता है। एेसे में कोई एक भी वाहन चालक सन्दिग्ध होता है तो निकट भविष्य में इलाके में बहुत बड़ी समस्या भी खड़ी हो सकती है।