छात्रवृत्ति घोटाले के कथित आरोपी की शासन द्वारा बहाली पर घोटाले के शिकायतकत्र्ता ने आपत्ति जताई


हरिद्वार।
उत्तराखंड के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले के कथित आरोपी की शासन द्वारा बहाली पर घोटाले के शिकायतकत्र्ता पंकज लांबा ने आपत्ति जताई है।
गीताराम नौटियाल की बहाली पर शिकायतकर्ता पंकज लांबा ने कहा कि एेसा प्रतीत होता है कि सरकार ने छात्रवृत्ति घोटाले में सम्मिलित अधिकारियों एवं नेताआे को बचाने के लिए अपने हाथ पैर मारने शुरू कर दिए हैं। क्योंकि गीताराम नौटियाल को अर ज्यादा नाराज करने से नटियाल द्वारा सभी की पल खुलने का खतरा बना हुआ है। सरकार क डर है कि कहीं अगर यह सरकारी गवाह बन गया तो सरकार के कई बड़े अधिकारी एवं कई बड़े बड़े नेताआें पर इस घोटाले की गाज गिर सकती है। जबकि नौटियाल ने पहले ही उच्च न्यायालय में शपथ पत्र के रूप में धमकी दे रखी है।
बता दें कि छात्रवृति घटाले में समाज कल्याण के संयुक्त निदेशक गीताराम नटियाल क एसआईटी ने थाना सिडकुल हरिद्वार में पंजीकृत मुकदमा संख्या 49६/18 धारा 4२0,4९,12बी भादवि धारा—13(1)डी/13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में 13 नवंबर 2१९ क गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। शिकायतकर्ता लांबा के मुताबिक लगभग 1 वर्ष तक यह उच्च न्यायालय को भ्रमित करता रहा अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए इसने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को भ्रमित कर आयोग से यह आदेश भी प्राप्त कर लिया कि इसकी गिरफ्तारी ना हो ना ही इससे कोई पूछताछ की जाए। छात्रवृत्ति घोटाले के शिकायतकर्ता पंकज लांबा द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी के लिए उच्च न्यायालय नैनीताल में नई पीआईएल संख्या 129/2१९ डालनी पड़ी। जिसमें गीताराम नौटियाल सहित राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग एवं एसआईटी तीनों को पार्टी बनाया गया। आयोग ने उच्च न्यायालय नैनीताल में अपना शपथ पत्र पेश किया जिसमें बताया कि गीताराम नौटियाल ने यह बात आयोग से छिपाई कि उक्त वाद न्यायालय में विचाराधीन है। इस पर न्यायालय ने गीताराम नौटियाल पर न्याय प्रक्रिया में व्यवधान डालने पर 250 जुर्माना तक लगा। इसके बावजूद गीताराम नौटियाल उच्चतम न्यायालय पहुंचे वहां पर भी याचिका खारिज कर दी गई। तब एसआईटी नेे गीताराम नौटियाल को भगोड़ा घोषित किया व संपत्ति की कुर्की के वारंट तक निकाले गए तब जाकर यह पकड़ा गया।
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