श्रावणी उपाकर्म, रक्षा बंधन जाने क्या है उचित समय

हरिद्वार श्रावण मास की पूर्णिमा सनातन धर्मियों और हिन्दू ब्राह्मणों के लिए महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इस दिन को ब्राह्मण अपना वर्ष भर का पुराना जनेऊ उतार, नये जनेऊ को धारण कर नूतन जन्म के पर्व के रूप में मनाते हैं,उपनयन और वेदारंभ संस्कार भी इसी दिन किया जाता है। वैदिक परंपरा के अनुसार वेदपाठी ब्राह्मणों के लिए श्रावण मास की पूर्णिमा सबसे बड़ा त्यौहार है। वर्ष भर यजमानों के लिए कर्मकांड यज्ञ, हवन आदि करने वाले ब्राहमण इस दिन खुद अपनी आत्मशुद्धि के लिए अभिषेक और हवन करते हैं। इस दिन रक्षाबंधन का त्यौहार तो मनाया जाता है लेकिन साथ ही इस दिन श्रावणी उपाकर्म भी किया जाता है। श्रावणी उपाकर्म को संस्कृत दिवस और ब्रहाम्ण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन दशस्नान,का विधान है,इस पर्व को ब्राह्मणों द्वारा सामूहिक रूप से पवित्र नदी के घाट पर मनाया जाता है। इस दिन स्नान और आत्म शुद्धि कर पितरों और खुद के कल्याण के लिए आहुतियां दी जाती हैं । ऐसा क्यों होता है इस संबंध में आचार्य प्रवीण झा ने बताया कि श्रावण ब्राह्मणों का मुख्य त्यौहार उपा कर्म है। इस दिन प्रत्येक ब्राह्मण पूरे वर्ष में किए गए ज्ञात अज्ञात पापो का शमन करते हुए समाज की रक्षा के लिए रक्षा सूत्र का निर्माण करता है। ब्राह्मण समाज ने सबसे कठिन समय अपने लिए ही चुना है। बरसात का काल कठिन समय होता है। क्षत्रियों के लिए दशहरा और वैश्य समाज के लिए दीवाली बहुत सुंदर मौसम होता है। और अन्य जातियों के लिए होली का त्यौहार बहुत ही अच्छे मौसम में होता है । चारों वेदों के ब्रह्मण अलग अलग होते है ऋग्वेद ब्राह्मणों के लिए उपाकर्म श्रवण शुक्ल पंचमी, श्रवण शुक्ल में हस्त नक्षत्र, ओर श्रावण शुक्ल में श्रवण नक्षत्र, ये तीनों हैं, वो जबकि यजुर्वेद के ब्राह्मणों के लिए श्रावण पूर्णिमा, श्रावण शुक्ल पंचमी, श्रावण शुक्ल में हस्त नक्षत्र परन्तु सभी विद्वानों ने श्रावण पूर्णिमा को ही सर्वोत्तम कहा हैे। यदि उस दिन ग्रहण हो तो दूसरी तिथियों में हो सकता है। इसके बाद सामवेद ब्राह्मणों के लिए भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में हस्त नक्षत्र में किया जाता है। इस दिन हेमाद्रि संकल्प के द्वारा समस्त पापो का विनाश किया जाता है। ये संकल्प ही बहुत ही लंबा होता है। इस संकल्प में पूरे विश्व का वर्णन है समस्त वन, अरण्य, नदियों, पुरियो, नागो, दीपो, राज्यो, देवताओं सभी का वर्णन हे। इसके बाद कई तरह का स्नान होता है इस पूरे कर्म काण्ड में 4 घंटे लग जाते हैैं, उसके बाद भद्रा रहित समय में रक्षा बांधी जाती है, बारह प्रकार की भद्रा होती है, धान्य, दधी मुखी, भद्रा, महामारी, खरा नना, काल रात्रि, महा रुद्रा, विस्टी, कुल पुत्रिका, भैरवी, महा काली, असुर छ य करी, इन बारह नामों का उच्चारण करते हुए भी भद्रा में रक्षा बंधन हो सकता है।
उन्होने कहा कि मेरे विचार से भद्रा में रक्षा बंधन नही करना चाहिए, इस बार रक्षा बंधन 3 अगस्त को सोमवार के दिन सूर्य के नक्षत्र में आएगी। इस दिन भद्रा प्रात 9:30तक होगी उसके बाद रक्षा बंधन कभी भी कर सकते हे। इसमें भी 11:59 से 12:47 तक अभिजीत योग उत्तराखंड में होगा इसमें रक्षा सूत्र बांधने से बहुत शुभ होगा। कुछ लोग जल्दी चाहते हैं तो वो 9:30 के बाद 10:43 तक भी शुभ की चौघड़िया में रक्षा बंधन कर सकते हैं।