प्राणी जगत में ममत्व लुटाती रहीं ‘माताजी’ :  डॉ. पण्ड्या

-गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती की 94वीं जयंती पर हुए कई कार्यक्रम
हरिद्वार।
अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा की 94वीं जयंती के अवसर गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में कई कार्यक्रम हुए। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम  वंदनीया माताजी को समर्पित रहा। प्रातः जागरण से लेकर हवन तक तथा विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन शांतिकुंज की बहिनों ने किया। यह आयोजन संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने निर्देशन सम्पन्न हुआ। उक्त सभी कार्यक्रम सोशल डिस्टेसिंग एवं सरकार द्वारा निर्देशित नियमों का पालन के साथ पूर्ण हुए।
अपने संदेश में अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि गायत्री परिवार के स्थापनाकाल से ही सर्वधर्म समभाव को अपनाते हुए ‘वन्दनीया माताजी’ समस्त प्राणी जगत में प्यार, ममत्व लुटाती रहीं। ऐश्वर्य सम्पन्न घराने में पली-बढ़ीं वन्दनीया माताजी कई अवसरों पर अपनी क्षमता से बाहर जाकर भी सेवाकार्य किया। साधारण गृहणी एवं अपने पति पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के प्रति समर्पित श्रमशील महिला के रूप में दिखने वाली वन्दनीया माताजी का असाधारण स्वरूप अंदर ही अंदर पकता तो रहा, परन्तु उभर कर तब आया, जब आचार्यश्री सन् 1959 में दो वर्ष के प्रवास पर हिमालय तप-साधना के लिए गये। माताजी के जीवन का यह अकेलापन कठिनाइयों भरा था, परन्तु उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, अपितु अपने वर्तमान दायित्वों  का निर्वाह करते हुए उन्होंने अखण्ड ज्योति पत्रिका का लेखन, सम्पादन एवं पाठकों का मार्गदर्शन आदि वे सभी कार्य बड़ी कुशलता से करना शुरू किया, जो आचार्यश्री छोड़कर गये थे। विकट से विकट परिस्थितियों में भी वन्दनीया माताजी संघर्ष पथ पर डटी रहीं और नारियों के लिए एक उत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया। वन्दनीया माताजी कहती थीं कि ‘हमारा अपना कुछ नहीं, सब कुछ हमारे आराध्य का है, समाज, राष्ट्र के लिए समर्पित है।’ आज लाखों-करोड़ों शिष्य उनके प्यार की डोर में बंधकर समाजोत्थान के कार्य में जुटे हैं।
वहीं हवन, दीपमहायज्ञ आदि कार्यक्रमों में बहिनों ने वन्दनीया माताजी को याद करते हुए उनके दिखाये मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। उधर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में भी विवि की कुलमाता माता भगवती देवी शर्मा की जयंती पर विविध कार्यक्रम आयोजित हुए।