नौ सैनिक, निडर और निर्भीक प्रहरी – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

-नेवी डे 2020 की थीम ‘‘विश्वसनीय और सामंजस्यपूर्ण, इंडियन नेवी कॉम्बैट रेडी’’
-नौ सैनिकों के अद्म्य साहस और बहादुरी को सलाम
-शहीदों को नमन और भावभीनी श्रद्धांजलि
-भारत का सॉफ्ट पावर और सेना के मजबूत इरादे ही भारत की असली ताकत
-नौ सैनिकों के फौलादी इरादों के सामने दुनिया का हर महासागर है सूक्ष्म

राहुल चौरसिया

ऋषिकेश।
भारतीय नौसेना दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने नौ सैनिकों के साहस और बहादुरी को सलाम करते हुये कहा कि हम भारतीयों को हमारी नौसेना की उपलब्धियों पर नाज़ है। बहादुरी, अद्म्य साहस और फौलादी इरादों से हर समस्या का समाधान करने वाले हमारे देश के नौ सैनिकों की देशभक्ति को नमन।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि नौसेना दिवस हमें वर्ष 1971 में भारतीय नौसेना को आपरेशन ट्राइडेंट में मिली शानदार जीत की याद दिलाता है। 4 दिसंबर, 1971 का दिन स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाने वाला हमारा गौरवमयी इतिहास है जो प्रत्येक नौसैनिक के मजबूत इरादों को बयां करता है। हमारे नौ सैनिक अनेक समस्याओं का सामना करते हुये लम्बे समय तक युद्धपोतांे, जल पोतों और जहाजों में रहकर अपने राष्ट्र की सीमाओं और समुद्री तटों की रक्षा करते हैं। हमारे समुद्री तट सुरक्षित हैं तो हम सब भारतवासी सुरक्षित हैं।
स्वामी जी ने कहा कि नौ सैनिकों की निष्ठा और देशभक्ति के कारण ही भारत के समुद्री तट सुरक्षित और समृद्ध है। भारत का सॉफ्ट पावर और सेना के मजबूत इरादे ही भारत की असली ताकत हंै। नौ सैनिकों के फौलादी इरादों के सामने दुनिया का हर महासागर सूक्ष्म है।
स्वामी जी ने कहा कि आज का दिन नौ सैनिकों की उपलब्धियों को समर्पित है और यह प्रत्येक भारतीय के लिये गर्व का विषय है। इन उपलब्धियों के पीछे भारत माता के कई वीर जवानों की शहदत का दर्द भी है। उन वीर शहीदों की शहदत को नमन, भावभीनी श्रद्धांजलि। हमारे सैनिक हमारे राष्ट्र की सीमा और समुद्री तटों पर बहादुरी के साथ खड़े होकर अपने वतन की रक्षा के लिये हमेशा तैनात रहते हैं। सैनिक हैं तो हमारा और हमारे राष्ट्र का अस्तित्व है तथा आज हम सब सुरक्षित हैं व जिंदा हैं। सैनिक अपनी जान को हथेली पर रखकर अपने देश की रक्षा करते हंै और भारत माता की रक्षा के लिये हसंते-हसंते अपनी जान कुर्बान कर देंते हैं। धन्य हंै वे माता-पिता जिन्होनें भारत को ऐसे बहादुर सपूत दिये जिनके कारण भारत आज गर्व से खड़ा है।