किसानों ने पीएम से कहा, इतने सालों से मोदी की मन की बात सुन रहे हैं अब वह हमारी बात सुनें

नई दिल्ली।

नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों का आंदोलन अब लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में किसानों का जमावड़ा डटा हुआ है। किसान संगठन लगातार सरकार से इन कानूनों को वापस लेने की बात कर रहे हैं। किसान और सरकार के बीच में अब तक के पांच दौर की वार्ता हो चुकी है। परंतु नतीजा नहीं निकल सका है। इस बीच किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। सिंघु बॉर्डर से भारतीय किसान यूनियन के जनरल सेक्रेटरी जगमोहन सिंह ने कहा कि उन्होंने बातचीत के लिए समय मांगा है पर पता नहीं किससे बात करेंगे ऑफिसर्स से कॉर्पोरेट घरानों से या नागपुर RSS से। इतने सालों से मोदी की मन की बात सुन रहे हैं अब ये किसानों के मन की बात सुनें।

किसान नेता बलदेव सिंह ने कहा कि गुजरात से 250 नौजवान किसानों का जत्था मोटरसाइकिलों पर दिल्ली आ रहा है। आंदोलन को तेज़ करना हमारी मज़बूरी है क्योंकि केंद्र सरकार हमारे मुद्दों पर संजीदगी से काम नहीं ले रही है। उन्होंने हमसे कहा था कि वो 7 तारीख को डॉक्यूमेंट पूरा करके बैठक करेंगे और ऐसा न हुआ तो हमें बताएंगे। फिर हमने उन्हें 8 तारीख दी थी पर उस दिन भारत बंद को तोड़ना हमें सही नहीं लगा। ये उनकी मंशा नहीं थी, हमारी ओर से ही 9 तारीख का समय दिया गया हैसिंघु बॉर्डर पर जय किसान आंदोलन से योगेंद्र यादव ने कहा कि 8 तारीख को सुबह से शाम तक भारत बंद रहेगा। चक्का जाम शाम तीन बजे तक रहेगा। दूध-फल-सब्ज़ी पर रोक रहेगी। शादियों और इमरजेंसी सर्विसेज़ पर किसी तरह की रोक नहीं होगी।

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इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के प्रमुख एम के स्टालिन तथा पीएजीडी के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला समेत प्रमुख विपक्षी नेताओं ने रविवार को एक संयुक्त बयान जारी कर किसान संगठनों द्वारा आठ दिसंबर को किये गये ‘भारत बंद’ के आह्वान का समर्थन किया और केंद्र पर प्रदर्शनकारियों की वैध मांगों को मानने के लिये दबाव बनाया। हजारों प्रदर्शनकारी किसानों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि मंगलवार को पूरी ताकत के साथ देशव्यापी हड़ताल की जाएगी। ये किसान तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए 26 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं।

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बयान में कहा गया है, ‘‘ राजनीतिक दलों के हम दस्तखत करने वाले नेतागण देशभर के विभिन्न किसान संगठनों द्वारा आयोजित भारतीय किसानों के जबर्दस्त संघर्ष के साथ एकजुटता प्रकट करते हैं और इन पश्चगामी कृषि कानूनों एवं बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग को लेकर उनके द्वारा आठ दिंसबर को किये गये भारत बंद के आह्वान का समर्थन करते हैं।’’ इस बयान पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव, समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी राजा, भाकपा (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, ऑल इंडिया फारवार्ड ब्लॉक (एआईएफबी) के महासचिव देवव्रत विश्वास और आरएसपी के महासचिव मनोज भट्टाचार्य ने भी दस्तखत किये हैं।

साभार प्रभा साक्षी..