-मूक बधिरो को कान की मशीन नही, स्मार्टफोन चाहिए

अधिकतर मूक बधिरो के लिए कान की मशीन प्रयोगहीन है -संदीप अरोडा
हरिद्वार। संवाददाता
देवभूमि बधिर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं जिला स्तरीय दिव्यांगता समिति के सदस्य संदीप अरोड$ा ने कहा कि गैल इंडिया लिमिटेड की तरफ से एलिम्को कंपनी द्वारा दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंग प्रदान करने हेतू उनका रजिस्ट्रेशन किया गया। साथ ही जिन दिव्यांगों के सर्टिफिकेट अभी तक नहीं बने हैं। उनके लिए सर्टिफिकेट बनाने की अलग से डाक्टरों द्वारा बेंच लगाई गई और समाज कल्याण विभाग द्वारा समस्त तरह की पेंशन योजना के लिए रजिस्ट्रेशन किए गए।
डा. राजीव अग्रवाल द्वारा यूडी आईडी कार्ड के रजिस्ट्रेशन किए गए। किंतु इस कैम्प में मूक बधिर से संबंधित कोई भी डाक्टर उपस्थित नहीं था और ना ही इंटरप्रेटर है। कैंप मे मूक बधिरो ने कान की मशीन लेने का विरोध किया। उनका कहना है कि जो बधिर जिनका प्रतिशत अधिक है या सौ प्रतिशत है उनको इस मशीन से जरा भी लाभ नही है। क्योंकि एेसे बधिरजन तो लिप्स पहचान कर बात करते हैं या साईन लैंग्वेज मे 4जी स्मार्ट फोन के जरिए वार्तालाप करते हैं। इसलिए उन्हें स्मार्टफोन की आवश्यकता है।
संदीप अरोड$ा ने यह भी कहा कि जो मूक बधिर मशीन लेना नही चाहते तो उनके लिए विकल्प के तौर पर स्मार्टफोन उपलब्ध कराया जाना चाहिए क्योकि एेसे बधिर लोग कई बार मशीन लेकर फेंक भी देते हैं। संदीप अरोड$ा ने यह वाक्या एलिम्को के अधिकारियो के सम्मुख रखा। अधिकारियो ने कम्पनी से बात करने का आश्वासन दिया है। जिलास्तरीय दिव्यांगता समिति के दूसरे सदस्य अमित धीमान ने कहा कि नेत्रहीन और अल्प दृष्टि वाले दिव्यांगो को भी अपनी अभिव्यक्ति व्यक्त करने के लिए स्मार्टफोन की आवश्यकता होती है। वह वयस मैसेज के जरिए अपनी बात दूसरो तक पहुंचाते है। उन्होने एलिम्को कैंप में रजिस्ट्रेशन करवा कर जल्द से जल्द यह सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।
कैंप से डाक्टर जल्द निकल गए
दिव्यांग कैंप का समय बैनर मे 1 से 4 बजे लिखा गया है। जबकि सभी डाक्टर एक बजे निकल गए। एक बजे के बाद जो दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने आए थे। डाक्टरो के चले जाने के कारण वे प्रमाण बनवाने से वंचित रह गए।