अस्थायी पुलिया पर झूलती 40 परिवारों की जिंदगियां, जिम्मेदार बेपरवाह

उत्तरकाशी। सूबे की डबल इंजन सरकार पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की बयार बहाने के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकती. लेकिन इन दावों की खोखली हकीकत वे गांव करते हैं, जो मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। हम बात कर रहे हैं उत्तरकाशी जिले के स्युणा गांव की, यहां भागीरथी नदी पर बने अस्थायी पुलिया को एक बार तसल्ली से देख लीजिए। इन तस्वीरों से आपको सारा मामला समझ में आ जाएगा। हैरत और सिर पीटने वाली बात ये है कि ये गांव जिला मुख्यालय से महज चार किलोमीटर दूर है।
उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय से महज 4 किमी की दूरी पर स्थित स्युणा गांव की तस्वीर आज भी सुधर नहीं पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बसे 35 से 40 परिवार दो ग्राम सभाओं मांडो और सिरोर के अंतर्गत आते हैं। लेकिन उसके बाद भी आज तक शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नजर ग्रामीणों की समस्या पर नहीं पड़ रही है।
सर्दियों में भागीरथी का जलस्तर कम होने पर ग्रामीण गंगोरी से स्युणा गांव के लिए हर वर्ष लकड़ी की अस्थायी पुलिया बनाते हैं, जो बांध से पानी छोड़े जाने पर नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ बह जाता है। फिर ग्रामीण इस पुलिया का निर्माण करते हैं और वर्षों से यही सिलसिला जारी है.स्युणा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी आते ही नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। फिर ग्रामीण भागीरथी नदी के किनारे से करीब 3 किमी की अतिरिक्त पैदल दूरी तय करते हैं। लेकिन बरसात में कई बार वे रास्ते भी नदी के विकराल जलस्तर में डूब जाते हैं. ऐसे में उन्हें गांवों में ही कैद होना पड़ता है।