शवों की ढूंढ खोज जारी, बैराज साइट से दो शव बरामद हुए

जोशीमठ। ऋषिगंगा की जल प्रलय के बाद से ही प्रभावित क्षेत्र में राहत-बचाव कार्य जारी है। 14 दिनों से मलबे में शवों की ढूंढखोज की जा रही है। तपोवन सुरंग में लगातार पानी का रिसाव होने से मलबा हटाने का कार्य प्रभावित हो रहा है। पानी के रिसाव के लिए दो पंप मशीनें लगाई गई हैं। वहीं आज शनिवार को बैराज साइट से दो शव बरामद हुए हैं।
अब एनटीपीसी की ओर से एक और मशीन पानी निकालने के लिए लगाई जा रही है। तपोवन सुरंग से लगभग 162 मीटर तक मलबा हटा लिया गया है। लेकिन सुरंग में पानी भरा होने के कारण मलबा हटाने में दिक्कतें आ रही हैं। बैराज में भी मलबा और पानी हटाने का कार्य जारी है। जेसीबी मशीनों से मलबा डंपर में भरकर निस्तारित किया जा रहा है। बैराज में भी पानी और बोल्डर अटके होने से मलबा हटाने में दिक्कतें आ रही हैं। जिलाधिकारी स्वाति एस भदोरिया ने बताया कि सुरंग और बैराज में पानी और मलबे को हटाया जा रहा है। रैणी में मलबे की सफाई की जा रही है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और आपदा प्रबंधन की टीमें धौली गंगा और ऋषिगंगा के संगम स्थल पर रेस्क्यू में लगे हुए हैं।
चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषिगंगा और धौलीगंगा में आपदा के बाद ऋषिगंगा नदी के मुहाने पर बनी झील की गहराई कितनी है, इससे पर्दा उठ गया है। गोताखोर शनिवार को झील तक पहुंचे और झील की गहराई, चैड़ाई और लंबाई की जानकारी ली। गोताखोरों ने झील में उतरकर इसकी गहराई मापी। बताया गया कि औसतन झील आठ मीटर गहरी, 50 मीटर चैड़ी और 750 मीटर लंबी है। टीम ने झील का निरीक्षण भी किया है। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि विशेषज्ञों की टीम झील के मुहाने पर पहुंच गई है। रविवार को टीम लौटने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।