शिक्षा के सुधार के लिए जानिए कहा हुआ मंथन, हिंदी नाटकों की भूमिका को भी सराहा

हरिद्वार।

उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय भाषा एवं आधुनिक ज्ञान विज्ञान विभाग तथा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (‌IQAC) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया जिसका मुख्य विषय ” शिक्षा की गुणवत्ता एवं हिंदी नाटकों के संदर्भ पर सुप्रसिद्ध विद्वान प्रोफेसर आर.शशीधरन (पूर्व प्रति कुलपति कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कोचीन) ने अपना व्याख्यान दिया
शिक्षा की गुणवत्ता एवं हिंदी नाटकों के संदर्भ विषय पर – बोलते हुए प्रोफेसर आर. शशिधरन ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने तथा बताने में हिंदी नाटकों का प्रमुख स्थान है हिंदी नाटक जहां शिक्षा में स्त्री विमर्श किन्नर विमर्श तथा उपेक्षित समाज या निचले तबके से लेकर अंत में खड़े व्यक्ति की आवाज को बुलंद करते हैं अर्थात समाज द्वारा उपेक्षित व्यक्ति को अपना विषय बनाकर उसे प्रस्तुत करते हैं जिसका असर उस समाज की शिक्षा प्रणाली पर पड़ता है तथा विषय के माध्यम से समाज या उस व्यक्ति की आवाज प्रमुख धारा तक पहुंचती है जिससे उनके जनजीवन में सुधार होता है भारतीय भाषाओं के नाटकों ने उपेक्षित लोगों के जीवन को मुख्यधारा में लाने का काम किया है गूगल मीट द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर देवी प्रसाद त्रिपाठी ने नारी शिक्षा, नारी सम्मान पर बल देते हुए परिवार को सुसंस्कृत बनाने की बात पर बल दिया ।
कार्यक्रम का संचालन आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक तथा आधुनिक ज्ञान विज्ञान संकाय के अध्यक्ष प्रोफेसर दिनेश चंद्र चमोला ने किया कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने किया कार्यक्रम में डॉ सुमन भट्ट, सुशील चमोली शोध छात्र अनूप बहुखंडी, ललित शर्मा,रीना अग्रवाल,धीरज चौहान,आरती सैनी,अनीता एवं नरेंद्र थपलियाल इत्यादि शामिल रहे।