….तो अपने सामाजिक दायित्वों से किनारा कर पूरा करेगा भेल अपना घाटा

हरिद्वार(कुमार दुष्यंत)।

भेल देश की नवरत्न कंपनी है।हरिद्वार की जिस पवित्र भूमि पर उसका उपक्रम है, उसके प्रति अपने नैतिक-सामाजिक दायित्वों के तहत वह हरिद्वार के लोगों को रोजगार, उनके बच्चों को शिक्षा,वृक्षारोपण, पार्कों का सौंदर्यीकरण आदि का निर्वहन करती है।लेकिन अब अपने घाटे को पाटने के लिए भेल अपने इन दायित्वों से किनारा करने जा रही है।इसकी शुरुआत हरिद्वार के बच्चों को भेल के स्कूलों में प्रवेश से वंचित कर की जा रही है।
भेल के शिक्षा बोर्ड ईएमबी द्वारा प्रत्येक वर्ष की तरह इसबार भी जून में प्रवेश के इच्छुक छात्र-छात्राओं से आवेदन ले लिए गए थे।लेकिन इन आवेदक छात्रों को अबतक प्रवेश नहीं दिया गया है।जबकि जून से ही भेल के स्कूल खुल गए हैं ।अधिकारी दबी जुबान में बता रहे हैं की भेल अपने घाटे से उबरने के लिए अपने खर्चों को कम करना चाहता है।इसके तहत ही वह अपने घोषित नैतिक दायित्व ‘हरिद्वार के नागरिकों के बच्चों को शिक्षा सुविधा’ से वंचित करने जा रहा है।भेल के इस निर्णय से हरिद्वार ज्वालापुर कनखल भीमगौडा आदि क्षेत्रों के सैंकड़ों अभिभावक चिंता में हैं।क्योंकि भेल के स्कूलों में प्रवेश के आश्वासन के साथ महीने भर पहले ही उनसे आवेदन ले लिए गए थे।जबकि अब भेल इस जिम्मेदारी से बचता दिखाई दे रहा है।स्कूलों में पढाई शुरू हो जाने के कारण अब अन्य स्कूलों में भी प्रवेश का विकल्प नहीं हैं।भेल के इस निर्णय से प्रभावित होने वाले हरिद्वार के सैंकड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है।