रेल टिकट पर भी छोड़ सकेंगे सब्सिडी: रेलवे लाएगा गिव इट अप पॉलिसी

भारतीय रेल अगले महीने से अपने मुसाफिरों से गैस सब्सिडी के तर्ज पर रेल किराये में मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने की अपील करेगा. रेलवे फिलहाल यात्री किराये पर 43 फ़ीसदी की सब्सिडी देता है. सब्सिडी छोड़ने के लिए रेलवे की तरफ से टिकट बुक कराते समय तीन ऑप्शन दिए जाएंगे. जिसमें पूरी सब्सिडी छोड़ने या आधी सब्सिडी छोड़ने की अपील होगी. जबकि तीसरा ऑप्शन होगा कि मुसाफ़िर कोई सब्सिडी छोड़ना नहीं चाहता है।

भारतीय रेल में भी अब होगी गिव इट अप की शुरुआत. यानी रेलवे अब अपने मुसाफिरों से किराये पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने की अपील करेगा. अगर आप आर्थिक रूप से सक्षम हैं और भारतीय रेल की सुविधाएं आपको खुश कर रही हैं तो आप हर सफ़र में किराये पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ सकते हैं.

दिल्ली-हावड़ा के बीच सुपरफ़ास्ट ट्रेन के टिकट के उदाहरण से देखें (सब्सिडी)

स्लीपर क्लास का टिकट 630 रुपये का होता है. लेकिन अगर आप इसपर पूरी सब्सिडी छोड़ते हैं तो आपको इसके लिए 1110 रुपये देने होंगे.एसी 3 क्लास के लिए पूरी सब्सिडी छोड़ने पर 1670 की जगह 2930 रुपयेएसी 2 क्लास के लिए पूरी सब्सिडी छोड़ने पर 2425 रुपये की जगह 4255 रुपयेऔर एसी 1 के लिए 4165 की जगह 7310 रुपये चुकाने होंगे।
हालांकि भारतीय रेल इसकी तैयारी लंबे समय से कर रहा था लेकिन उसे डर था कि कहीं लोगों के बीच इससे नाराज़गी न पैदा हो जाए. फिर भी अचानक यह फैसला लेने के पीछे 950 रुपये का एक चेक है।

भारतीय रेल को एक मुसाफ़िर ने 950 रुपये का यह चेक भेजा है. दरअसल आजकल जब आप रेलवे रिज़र्वेशन कराते हैं तो आपके टिकट पर लिखा होता है, “ क्या आप जानते हैं कि आपके किराये का 43 फ़ीसद देश के आम नागरिक वहन करते हैं”. यानी कि रेल मुसाफिरों के सफर पर रेलवे 43 फ़ीसदी की सब्सिडी देती है. यह सब्सिडी आम जनता के टैक्स के पैसे से दी जाती है. 950 रुपये के इस ऐतिहासिक चेक के पीछे भी यही कहानी है।

फ़रीदाबाद के अवतार सिंह खेर ने 18 मई को दिल्ली से जम्मू राजधानी का टिकट लिया. जब उन्होंने टिकट पर भी 43 फ़ीसद सब्सिडी की बात लिखी देखी तो उन्हें खयाल आया कि रेलवे को ये पैसे वापस कर देने चाहिए. अवतार सिंह को लगा कि यह लाभ केवल उन लोगों को लेना चाहिए जो आर्थिक रूप से बहुत सक्षम नहीं हैं. फिर अवतार सिंह ने हिसाब लगाया कि उन्हें टिकट पर कितने रुपये की छूट मिली है. यह रकम निकली 950 रुपये. उसके बाद उन्होंने रेलमंत्री के नाम एक चिट्ठी लिखी और 950 रुपये के चेक के साथ रेलमंत्री को भेज दी. यह चेक आईआरसीटीसी के नाम पर है. अब रेलवे के सामने ये समस्या है कि न तो ‘आईआरसीटीसी’ के नाम से कोई बैंक खाता है और न ही कानूनन भारतीय रेल इस पैसे को वापस ले सकता है।

लेकिन इस चेक के मिलने से रेलवे को प्रेरणा मिली वो करने की जिसका ख़याल रेलवे को पहले भी आ चुका था. इसी से प्रेरित हो कर अब भारतीय रेल ने गैस सब्सिडी के तर्ज़ पर किराये पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने की अपील करने की योजना बनाई है. सब्सिडी छोड़ने की इस योजना का सबसे ज्यादा नुकसाल एसी3 के मुसाफिरों को होगा. क्योंकि यात्री किराये पर भले ही रेलवे को 43 फ़ीसदी का नुकसान हो रहा है लेकिन रेलवे को मुनाफ़ा केवल एसी3 के मुसाफिर ही देते हैं. अगर अलग अलग क्लास को रेलवे किराये पर मिलने वाली सब्सिडी पर गौर करें तो सब अर्बन ट्रेन पर 64 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ता है.जबकि नॉन सब अर्बन ट्रेन के सवारी डिब्बों पर 40 फीसदी का नुकसान.वहीं एसी1 पर करीब 24 फीसदी का नुकसानएसी 2 पर करीब 27 फीसदी नुकसानस्लीपर क्लास से करीब 34 फीसदी का नुकसान औरचेयर कार से करीब 16 फीसदी का नुकसान होता है.रेलवे को केवल एसी 3 क्लास के सवारियों को ढोने में फायदा होता है जो कि क़रीब 7 फीसदी का फायदा है.रेलवे के आंकड़ों में इस सब का औसत 43 फ़ीसदी है यानि उसे हर मुसाफिर के टिकट पर 43 फीसदी का नुकसान होता है।