आठ बजे के बाद होता है राक्षसी स्नान ?

खानपुर।(अश्वनी पंडित)

आजकल अधिकतर लोग सुबह जल्दी नहा नहीं पाते और सूरज सर पर चढ़ने के बाद ही नहाते हैं। आज भी जरूर सूरज के प्रचंड रूप के आने के बाद ही नहाते हैं। अगर हां तो सावधान हो जाएं,
प्रसिद्ध ज्योतिषचार्य पंडित संदीप भारद्वाज शात्री का कहना है कि क्योंकि आपके नहाने का ये समय आपको भारी पड़ सकता है। धर्मशास्‍त्र में 4 प्रकार का स्नान बताया गया है, जिसे घर की शांति और सुख समृ‌द्घि से लेकर आपकी आर्थिक तंगी से जोड़ा गया है।सुबह 4 से 5 बजे के बीच का स्नान मुनि स्नान होता है, जिसे सर्वोत्तम माना गया है। कहा जाता है कि मुनि स्नान करने से घर में सुख शांति, समृद्घि, बल और चेतना आदि आती है।सुबह 5 से 6 के बीच नहाने से जीवन में यश, कीर्ति, धन, वैभव और संतोष की प्राप्ति होती है। इसे देव स्नान मानते हैं। जो शास्‍त्रों के अनुसार उत्तम है। मानव स्नान तीसरे प्रकार का स्नान होता है, जो सुबह 6 से 8 बजे के बीच किय जाता है। मानव स्नान को समान्य माना गया है। जो व्यक्ति इस समय स्नान करता है उसे काम में सफलता मिलती है।
आखिर स्नान राक्षसी स्नान होता है, जो आमतौर पर होने लगा है। सुबह 8 बजे के बाद किय गया स्नान इस श्रेणी में आता है। इस स्नान को धर्म में निषेध माना गया है। इस स्नान को करने से घर में गरीबी, हानि, कलेश और धन की हानि होती है।