हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल है अमरनाथ की पवित्र यात्रा

अमरनाथ गुफा हिंदुओं की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र हैं. मान्यता के मुताबिक भगवान शिव ने यहीं पर पार्वती को अमर होने का रहस्य बताया. लेकिन इस पौराणिक मान्यता से ज्यादा बड़ी बात ये है कि इस गुफा को पहली बार एक मुस्लिम ने ढूंढने का दावा किया. यही वजह है कि कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों ने इस आतंकी हमले को हिंदू मुस्लिम एकता तोड़ने की नापाक कोशिश बताई है.

हिन्दू आस्था का बड़ा केंद्र है अमरनाथ
हर साल लाखों लोग इसी उत्साह और श्रद्धा के साथ अमरनाथ की यात्रा पर निकलते हैं. हिंदुओं के सबसे पवित्र तीर्थ स्थल के दर्शन के लिए देश के अलग अलग हिस्सों से लोग आते हैं।
बाबा बर्फानी के दर्शन की ये परंपरा कब से शुरू हुई।इसका कोई प्रमाणिक इतिहास नहीं है. लेकिन कहा जाता है कि हिंदुओं की इस पवित्र यात्रा के पीछे मुस्लिम समुदाय की बड़ी भूमिका है. दरअसल इसकी शुरूआत अमरनाथ गुफा की खोज से ही होती है।

मुसलमान चरवाहे ने की थी पवित्र गुफा की खोज
कहा जाता है कि करीब 167 साल पहले एक मुसलमान ने ही पहली बार बाबा अमरनाथ की इस गुफा को ढूंढा था. करीब 13000 फुट की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा के बारे में तब तक किसी को नहीं पता था. कहानी के मुताबिक साल 1850 में एक मुस्लिम चरवाहा बूटा मलिक अपनी बकरियां चराते हुए यहां तक पहुंचा तो उसे अचानक इस गुफा के दर्शन हुए. चरवाहे ने ये बात गांववालों को बताई तो लोग दर्शन के लिए यहां पहुंचे।उसके बाद से मलिक का परिवार इस गुफा की देखभाल करने लगा. हिंदुओं की आस्था का ध्यान रखते हुए दशनामी अखाड़े और पुरोहित सभा मट्टन के पुजारियों को गुफा का संरक्षक बनाया गया और तब से ही अमरनाथ गुफा से मुस्लिमों का रिश्ता जुड़ गया.

अमरनाथ यात्रा से सालों से जुड़े रहे हैं मुसलमान
साल 2000 तक पुरोहित सभा ही अमरनाथ यात्रा के आयोजन की पूरी जिम्मेदारी संभालती थी उसके बाद से श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ये काम करने लगा. लेकिन अमरनाथ यात्रा में मुस्लिमों की भूमिका तब भी खत्म नहीं हुआ क्योंकि यात्रा के लिए घोड़े चलाने वालों से लेकर दूसरी जरूरतों के लिए स्थानीय मुस्लिम लोग सालों से इससे जुड़े हुए हैं. इस वजह से अमरनाथ यात्रा एक तरह से कश्मीरियत का हिस्सा बन चुकी है.

यात्रियों पर हमला करने वालों को महबूबा ने बताया मुस्लिमों और कश्मीरियों पर धब्बा
गुफा के दर्शन कर लौट रहे यात्रियों पर आतंकी हमले की घटना के बाद जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती घायलों से मिलने अस्पताल गईं तो उन्होने भी इस हमले को मुस्लिमों और कश्मीरियों पर धब्बा बताया।

फारूक अब्दुल्ला ने की हमले की कड़े शब्दों में निंदा
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी इस हमले को कश्मीर के सांप्रदायिक सद्भाव को खराब करने की कोशिश बताया. फारूक ने इस हमले पर देश के लोगों से माफी मांगते हुए कहा कि हमले को अंजाम देने वाले ने कश्मीरी हो सकते हैं न मुसलमान।

अमरनाथ यात्रा पर हुए आतंकी हमले के खिलाफ सड़कों पर उतरे कश्मीरी
अमरनाथ यात्रा से कश्मीर में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है. जिसका फायदा सभी कश्मीरियों को मिलता है।अमरनाथ यात्रा को यहां कभी सिर्फ हिंदू धर्म से जोड़कर नहीं देखा गया यही वजह है कि आज इस हमले के बाद कश्मीर के लोग इस हमले के खिलाफ सड़कों पर उतर आए।