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अंकिता को न्याय दिलाने को सड़कों पर उतरे लोग

-सीबीआई कार्यालय पर तालाबंदी कर दिया धरना
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकाण्ड में मृतका को न्याय दिलाने की मांग को लेकर गुरूवार को युवाओं, महिलाओं व सामाजिक संगठनों ने सीबीआई कार्यालय कूच कर कार्यालय पर तालाबंदी की साथ ही जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सीबीआई भी जांच के नाम पर लीपापोती कर रही है।
आज यहां वीरांगना अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने देहरादून में सीबीआई कार्यालय कूच किया। कार्यक्रम का उद्देश्य अंकिता भंडारी हत्याकांड में लंबित सवालों पर सीबीआई से जवाब मांगना था। प्रदर्शनकारियों ने सीबीआई कार्यालय के बाहर के गेट पर तालाबंदी करते हुए आरोप लगाया है कि सीबीआई इस मामले में ढील बरत रही है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में आज तक कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। विशेष रूप से यह सवाल उठाया गया कि वीआईपी की जड़ में दुष्यंत गौतम और अजय कुमार जैसे नाम सामने आने के बावजूद अब तक सीबीआई ने उन्हें पूछताछ के लिए क्यों नहीं बुलाया। आंदोलनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जिस रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाकर संभावित साक्ष्य मिटाए गए, उस मामले में भी आज तक जिम्मेदार लोगों पर कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री से भी जवाब मांगा गया कि आखिर साक्ष्य मिटाने जैसी गंभीर कार्रवाई किसके आदेश पर हुई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कुछ समय पहले जब प्रतिनिधिमंडल सीबीआई कार्यालय गया था, तब अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिया गया था कि जांच की प्रगति और महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराया जाएगा, लेकिन आज तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कार्यक्रम के दौरान अंकिता भंडारी के माताकृपिता के संघर्ष और पीड़ा को भी प्रमुखता से उठाया गया। आंदोलनकारियों ने कहा कि एक परिवार अपनी बेटी के लिए लगातार न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक उन्हें केवल इंतजार और आश्वासन ही मिला है। प्रदर्शन में यह सवाल भी उठाया गया कि अनिल जोशी की एफआईआर के आधार पर जांच शुरू होने के बावजूद संबंधित लोगों से अब तक गंभीर पूछताछ क्यों नहीं हुई। आंदोलनकारियों ने कहा कि अगर जांच निष्पक्ष है तो फिर महत्वपूर्ण नामों पर चुप्पी क्यों है। कार्यक्रम में “सीबीआई जवाब दो”, “अंकिता भंडारी को न्याय दो”, “वीआईपी को गिरफ्तार करो”, “दुष्यंत गौतम को बुलाओ”, “अजय कुमार से पूछताछ करो” और “साक्ष्य मिटाने वालों को गिरफ्तार करो” जैसे नारे लगातार गूंजते रहे। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कहा कि यह लड़ाई केवल अंकिता भंडारी के लिए नहीं, बल्कि न्याय, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही की लड़ाई है। यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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