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धधकते जंगलों की आग ने लिया विकराल रूप

-पूरा वातावरण हुआ घुटन भरा
रुद्रप्रयाग। रुद्रप्रयाग में पहाड़ों पर धधकते जंगल अब विकराल रूप धारण कर चुके हैं। आग की लपटें केवल जंगलों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि इसका असर आम जनजीवन, पर्यावरण और चारधाम यात्रा पर भी साफ दिखाई देने लगा है। चारों ओर फैला जहरीला धुआं लोगों के लिए आफत बन गया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और पूरा वातावरण घुटन भरा महसूस हो रहा है।
बेशकीमती वन संपदा राख में तब्दील हो रही है, जबकि वन्यजीव अपनी जान बचाने के लिए आबादी वाले क्षेत्रों की ओर भागने को मजबूर हैं। पहाड़ों से उठता घना धुआं दिन में सूरज की रोशनी को धुंधला कर रहा है, वहीं रात में चांद तक दिखाई नहीं दे रहा। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानों पूरा रुद्रप्रयाग जनपद धुएं की चादर में कैद हो गया हो। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि कई क्षेत्रों में विजिबिलिटी लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है। इसके बावजूद केदारनाथ यात्रा के लिए हेली सेवाएं लगातार संचालित हो रही हैं। घने धुएं और धुंध जैसे हालातों में हेलीकॉप्टर उड़ानों को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन को तत्काल इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और सुरक्षा मानकों की सख्ती से जांच करानी चाहिए। लोगों ने सवाल उठाए हैं कि जब घाटियों में धुएं के कारण दृश्यता बेहद कम है, तब आखिर यात्रियों की जान जोखिम में डालकर उड़ानें क्यों संचालित की जा रही हैं।
वनाग्नि ने प्रकृति, पर्यावरण, वन्यजीव और इंसानी जिंदगी सभी को संकट में डाल दिया है। जगह-जगह जंगल धधक रहे हैं, लेकिन आग पर अब तक पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है। लगातार फैलती आग और धुएं ने लोगों की चिंता और भय दोनों बढ़ा दी है।

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