-तृतीय केदार के नाम से विश्व विख्यात है बाबा का धाम
-चंद्रशिला की चोटियों पर खिंच रही सुनहरी आभा
रुद्रप्रयाग। देवभूमि में समुद्र तल से 3680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ का धाम इन दिनों देश-दुनिया के श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पंचकेदारों में तृतीय स्थान रखने वाला यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता बल्कि अपनी अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए भी विश्व विख्यात है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के पश्चात आत्मग्लानि से मुक्ति और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पांडवों ने इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी। यहां भगवान शिव की बाहुओं (भुजाओं) की पूजा की जाती है। पत्थरों की अद्भुत स्थापत्य शैली से निर्मित इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसका जीर्णोद्धार आदि गुरु शंकराचार्य ने किया था। मंदिर के गर्भगृह में विराजमान स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालु असीम शांति का अनुभव करते हैं। वर्तमान में ग्रीष्मकालीन यात्रा के दौरान हजारों की संख्या में भक्त कठिन चढ़ाई पार कर बाबा तुंगनाथ के दरबार में पहुंच रहे हैं, जिससे पूरी घाटी शिव के जयकारों से गुंजायमान है।




