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लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास!

-डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट
विपक्ष के 128 लोकसभा सदस्यों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए एक नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंप दिया है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि उन्होंने नियम 94सी के तहत लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है।
लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ”बोलने की इजाजत नहीं देने”, साथ ही कांग्रेस की महिला सांसदों पर सदन में अनुचित स्थिति पैदा करने के आरोपों पर विपक्ष अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए यह प्रस्ताव लाया है।लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सांसद मोहम्मद जावेद तथा अन्य कई सांसद नोटिस सौंपने वालो में शामिल है।लोकसभा की प्रक्रिया और आचरण के मानदंडों के नियम 198 के अनुसार, विपक्ष को लोकसभा में मतदान से पहले अविश्वास प्रस्ताव के अपने अनुरोध के लिए औचित्य प्रदान करने की आवश्यकता नहीं है।अविश्वास प्रस्ताव की पूरी प्रक्रिया लोकसभा की प्रक्रिया व कार्य संचालन प्रणाली के नियम 198 (1) से नियम 198 (5) तक के तहत पूरी की जाती है।इस प्रक्रिया के तहत नियम 198 (1) (क) के तहत अविश्वास प्रस्ताव पेश करने वाले सांसद को पहले स्पीकर के जरिये सदन की अनुमति लेनी पड़ती है।सदन की अनुमति के लिए नियम 198 (1) (ख) के मुताबिक, प्रस्ताव की जानकारी सुबह 10 बजे से पहले लोकसभा के महासचिव को देनी पड़ती है।नियम 198 (2) के तहत प्रस्ताव के साथ सांसद को 50 सांसदों के समर्थन वाले हस्ताक्षर दिखाने होते हैं।नियम 198 (3) के तहत लोकसभा अध्यक्ष से प्रस्ताव को अनुमति मिलने के बाद उस पर चर्चा का दिन तय होता है। चर्चा प्रस्ताव पेश होने के 10 दिन के अंदर करानी होती है।नियम 198 (4) के तहत अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के अंतिम दिन लोकसभाध्यक्ष वोटिंग कराते हैं और उस आधार पर फैसला होता है।नियम 198(5) के तहत लोकसभा अध्यक्ष को टिप्पणी के लिए समय सीमा निर्धारित करने का अधिकार है। यदि प्रस्ताव सदन द्वारा अनुमोदित हो जाता है तो सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है ।अब तक लोक सभा में 27 बार अविश्वास प्रस्ताव रखे जा चुके हैं।लोक सभा में सबसे पहला अविश्वास प्रस्ताव अगस्त 1963 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार के खिलाफ जे बी कृपलानी ने पेश किया था। लेकिन विपक्ष सरकार गिराने में नाकाम हो गया था, क्योंकि इस प्रस्ताव के पक्ष में केवल 62 वोट पड़े और विरोध में 347 वोट पड़े थे।लेकिन सन 1978 में लाये गए अविश्वास प्रस्ताव ने मोरारजी देसाई सरकार को गिरा दिया था।अब तक सबसे ज्यादा 4 बार अविश्वास प्रस्ताव पेश करने का रिकॉर्ड माकपा सांसद ज्योतिर्मय बसु के नाम है। उन्होंने अपने चारों प्रस्ताव इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ रखे थे।सबसे ज्यादा अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने वाली भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार रही है। इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ 15 अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गये थे।इसके अलावा पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव और लाल बहादुर शास्त्री की सरकारों ने तीन-तीन बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना किया था।पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार इंदिरा गाँधी सरकार और दूसरी बार पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था ।संयोग की बात है कि अटल सरकार के खिलाफ भी दो बार सन1996 व सन1998 अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था और वे दोनों बार हार गये थे।सन
2018 में नरेंद्र मोदी सरकार के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था,लेकिन यह प्रस्ताव गिर गया था।
 लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला पर आरोप हैं कि वो विपक्ष के साथ भेदभाव करते हैं और सांसदों को बोलने का मौका कम देते हैं।हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब किसी लोकसभाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा रहा हो। संसद के इतिहास में कई बार ऐसा हो चुका है।
अविश्वास प्रस्ताव भारतीय संसदीय परंपरा का ही एक हिस्सा है। जब भी विपक्ष को सरकार या फिर लोकसभाध्यक्ष पर भरोसा नहीं होता है तो उन्हें हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है। लोकसभाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत लाया जाता है, इसे मोशन ऑफ रिमूवल कहा जाता है।इसके तहत लोकसभा के अध्यक्ष को हटाया जा सकता है। वोटिंग में बहुमत मिलने पर अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।भारतीय संसद के इतिहास में पहली बार सन1954 में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। लोकसभा के पहले अध्यक्ष मावलंकर के खिलाफ ये प्रस्ताव लाया गया था। सोशलिस्ट पार्टी के नेता विग्नेश्वर मिसिर ये प्रस्ताव लाए थे।इस प्रस्ताव पर करीब दो घंटे तक चर्चा हुई थी, हालांकि बाद में उसे खारिज कर दिया गया। इस प्रस्ताव को जवाहर लाल नेहरू ने सदन की गरिमा का सवाल बताया था।
सन1954 के बाद लोकसभाध्यक्ष के खिलाफ दूसरा प्रस्ताव सन 1966 में लाया गया।लोकसभा अध्यक्ष सरदार हुकम सिंह के खिलाफ ये प्रस्ताव था।वहीं तीसरी बार सन1987 में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, ये प्रस्ताव तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के खिलाफ लाया गया था।पिछले तमाम प्रस्तावों की तरह ये अविश्वास प्रस्ताव भी खारिज हो गया था।अब देखना यह है कि यह अविश्वास प्रस्ताव कितना चल पाता है।इससे लोकसभाध्यक्ष की कुर्सी जाती है या फिर यह प्रस्ताव धड़ाम गिरता है।फिलहाल तो संख्या बल देखते हुए ऐसा नही लगता कि ओम बिरला की कुर्सी जाएगी,बाकी आने वाला वक्त बताएगा।(लेखक राजनीतिक चिंतक व वरिष्ठ पत्रकार है)

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