-वन विकास निगम की 25वीं वर्षगांठ पर सीएम धामी ने की घोषणा
देहरादून। उत्तराखंड सरकार प्रदेश में मौन पालन पर विशेष जोर दे रही है। जिससे शहद उत्पादन के जरिए किसानों की आय को बढ़ाया जा सके। ऐसे में अब राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश में मौन पालन को बढ़ावा दिए जाने को लेकर वन क्षेत्र में भी बी- बॉक्स स्थापित किये जाएंगे। इसके लिए सीएम ने वन विभाग के अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट में लाने के निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड वन विकास निगम स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर, मुख्यमंत्री आवास में कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि घोषणा किया कि कुमाऊं मंडल में भी वन विकास निगम का कार्यालय खोला जाएगा। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौन पालन को और बढ़ावा देने के लिए वन क्षेत्र में बी- बॉक्स स्थापित करने का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाए। कार्यक्रम के दौरान सीएम धामी ने वन विकास निगम के कर्मचारियों के बच्चों को सम्मानित भी किया। सीएम ने कहा कि वन विकास निगम राज्य की इकोनॉमी के साथ ही इकोलॉजी के लिए भी महत्वपूर्ण है। निगम वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, वन उपज के टिकाऊ दोहन, आरक्षित वन क्षेत्रों में खनन और इको-टूरिज्म संचालन का कार्य करता है, साथ ही वन उत्पादों और प्रमाणित लकड़ी की सरकारी आपूर्ति करता है। उन्होंने कहा कि वन विकास निगम केवल आर्थिक गतिविधियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वन क्षेत्रों से सूखे, मृतप्राय और उखड़े हुए पेड़ों को हटाकर उनकी जगह नए वन क्षेत्र विकसित करने में भी सहयोग कर रहा है। साथ ही, इको-टूरिज्म के जरिए युवाओं और छात्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी काम कर रहा है।
हिमकाष्ठ मोबाइल एप्लीकेशन का लोकार्पण करते हुए सीएम ने कहा कि इस एप्लीकेशन के जरिए वन विकास निगम से लकड़ी की बिक्री की जा सकेगी। साथ ही फॉरेस्ट गुड्ज का ऑनलाइन ऑक्शन भी किया जा सकेगा। निगम की आधुनिक ई-नीलामी प्रणाली और अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाओं ने इस क्षेत्र में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने का काम किया है। उत्तराखंड वन विकास निगम ने अपनी इन 25 सालों की यात्रा में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। पिछले साल उत्तराखंड वन विकास निगम ने 167 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है।
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विश्व मंच से लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरनमेंट का आह्वान किया है जो मात्र एक नारा नहीं, बल्कि धरती मां को बचाने का एक महामंत्र है। उन्होंने उत्तराखंड आने वाले सभी पर्यटकों से अपील करते हुए कहा कि वे जब भी वे जंगल सफारी या किसी धार्मिक पर्यटन स्थल की यात्रा करें तो वहां गंदगी न फैलाएं. ये छोटा सा प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
उन्होंने कहा कि बीते कुछ दशकों में भौतिक विकास की जरूरत ने हमारी जीवनशैली को बदलने का काम किया है। अगर हम विकास की दौड़ में प्रकृति, पर्यावरण और वनों को पीछे छोड़ देंगे, तो हमारा ये विकास हमेशा अधूरा ही रहेगा। इसलिए सबका ये प्रयास होना चाहिए कि भौतिक विकास और पर्यावरण का संतुलन हर हाल में बना रहे।

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