Breakingउत्तराखंडउत्तराखंडधार्मिक

होल्यारों की टीम कर रही पुराने मंदिरों को बचाने की पहल

पौड़ी। होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि अपनों से जुड़ने और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने का माध्यम भी रहा है। एक दौर था, जब गांवों की होली, शहरों में बसे लोगों को पहाड़ वापस बुला लाती थी। लेकिन अब पलायन की मार ऐसी पड़ी है कि गांवों के घर ही नहीं, मंदिर भी सूने पड़ गए हैं। ऐसे में नैनीडांडा के होल्यार अब होली के जरिए अपने देवस्थलों को बचाने की मुहिम में जुटे हैं।
पौड़ी गढ़वाल जिले के नैनीडांडा के होल्यार इन दिनों उन इलाकों में होली गा रहे हैं, जहां पहाड़ से पलायन कर लोग बस गए हैं। होली के पारंपरिक गीतों के माध्यम से ये होल्यार अपने रक्षक देवी मां बुंगीदेवी मंदिर के करीब 400 साल पुराने मंदिर को बचाने की गुहार प्रवासी पहाड़ियों से लगा रहे हैं। रामनगर और आसपास के तमाम इलाकों में ये टीम ठेठ पहाड़ी अंदाज में घर-घर पहुंच रही है। होल्यार जहां अपनों को उनके बंद पड़े घरों की याद दिला रहे हैं। वहीं पहाड़ में बचे देवी-देवताओं के मंदिरों को सुरक्षित रखने की अपील भी कर रहे हैं। इन होल्यारों का दर्द यह है कि पौड़ी जिले का नैनीडांडा क्षेत्र भी पलायन प्रभावित है। यहां के कई लोग कोटद्वार और रामनगर में बस गए हैं। गांवों में अब होली गाने और आयोजन करने वाले लोग ही नहीं बचे। कुछ साल पहले तक होली और रामलीला जैसे आयोजनों से धन एकत्र होता था, जिससे गांव के कई सामुदायिक कार्य पूरे किए जाते थे। लेकिन अब गांवों के कई घरों में ताले लटके हैं। हालांकि, पहाड़ से तराई में पहुंची ये होली टीमें युवा पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रही हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!