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बदरीनाथ चढ़ावा चोरी मामला

-खुद पर लगे आरोपों को छिपाने के लिए मुझ पर आरोप लगा रहे बीकेटीसी अध्यक्षःगणेश गोदियाल

देहरादून। बदरीनाथ धाम मंदिर में चोरी का मामला अब राजनीतिक अखाड़ा बन गया है। इस पूरे मामले पर बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल आमने सामने आ गए हैं। साथ ही अब एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। इसी के तहत कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मंगलवार को देहरादून प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हए बीकेटीसी अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की। साथ ही कहा कि अपने को आरोपों से बचाने के लिए गणेश गोदियाल के कार्यकाल पर सवाल उठा रहे है।
गणेश गोदियाल ने कहा कि, अपने पापों को छिपाने के लिया ही नहीं, गणेश गोदियाल ने कहा कि, हाल ही में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बयान दिया कि इन्हीं सब चीजों को देखते बीकेटीसी को भंग कर देवस्थान बोर्ड बनाया गया था। लेकिन किसी बोर्ड को भंग करके व्यवस्था ठीक नहीं होती, बल्कि प्रशासन को व्यवस्था बेहतर करनी होती है।
बीकेटीसी अध्यक्ष ने उन पर आरोप लगाए हैं। ऐसे में उन पर जो आरोप लगे हैं, उसको सिद्ध करने की जिम्मेदारी सरकार की है। गणेश गोदियाल ने मीडिया को कुर्सी दिखाते हुए कहा कि, उनके बगल में कुर्सी लगी है, लेकिन वो (हेमंत द्विवेदी) नहीं आए, इसलिए सभी बातों पर बयान दे रहा हूं। अगर बीकेटीसी के अध्यक्ष उनको बुलाते हैं तो वो जरूर जाएंगे. लेकिन उनको कुछ दिन पहले इसकी जानकारी दे दें।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि, तमाम बातें सोशल मीडिया पर हो रही थी, उस कारण उन्होंने एक अच्छी राय दी कि यहां एक साथ आएं, ताकि हम एक दूसरे के बात को समझें और एक दूसरे के आरोपों को बताएं। हालांकि, वह (गणेश गोदियाल) तय समय पर यहां पहुंचे और अपनी बातों को रखा, लेकिन बीकेटीसी के अध्यक्ष यहां नहीं आए. ऐसे में अगर वो भविष्य में कहीं ओर कहेंगे तो वह वहां भी आ जाएंगे।
उन्होंने कहा कि, सरकार अपने पापों को छिपाने के लिए गणेश गोदियाल का सहारा ले रही है। जबकि उन्हें अपने पापों से निवृत्त होने के लिए गणेश गोदियाल से सुझाव लेना चाहिए।
अपने कार्यकाल के दौरान गणेश गोदियाल ने बिनसर मंदिर निर्माण का जिक्र भी किया। आरोप लगाया कि, बिनसर (पौड़ी) में मंदिर बनवाया था। मंदिर बनाना कोई अनैतिक काम नहीं है। क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल में बीकेटीसी ने मंदिर ही बनवाया था। दरअसल, शंकराचार्य ने जो बिनसर मंदिर बनाया था, उसकी स्थिति काफी दयनीय थी। यही नहीं, स्थानीय लोगों ने भी इस मंदिर के जीर्णोद्धार की मांग की थी। जिसके बाद बकायदा बीकेटीसी बोर्ड बैठक में इसका प्रस्ताव लाया गया।
बोर्ड में अध्यक्ष गणेश गोदयाल के अलावा सभी नामित सदस्य भाजपा सरकार के कार्यकाल के ही थे। इसके बाद जब साल 2017 में कांग्रेस चुनाव हार गई और फिर सत्ता में भाजपा सरकार के दौरान धन सिंह रावत ने अपनी सत्ता का दुरुपयोग करते हुए पौड़ी के डीएफओ के द्वारा उस मंदिर के काम को रुकवा दिया। मंदिर का काम रुकने तक करीब 9 लाख रुपए खर्च हुए थे, जबकि पूरे काम का बजट ढाई तीन करोड़ रुपए था। इसके बाद त्रिवेंद्र सरकार ने बीकेटीसी को भंग कर देवस्थानम बोर्ड लागू कर दिया. साथ ही देवस्थानम बोर्ड बैठक के दौरान त्रिवेंद्र सरकार ने मंदिर के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

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