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सावन के महीने में धर्मनगरी में आस्था का महासैलाब

-60 साल की महिलाओं के कंधों पर कांवड़
हरिद्वार। सावन के महीने में धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ मेले का उत्साह अब चरम सीमा पर पहुंच गया है। गंगा घाटों से लेकर प्रमुख कांवड़ मार्गों तक आस्था का ऐसा जनसैलाब उमड़ रहा है, जिसमें उम्र की कोई सीमा दिखाई नहीं दे रही। पांच साल के मासूम बच्चों से लेकर 60 वर्ष तक की बुजुर्ग महिलाएं भी कंधों पर कांवड़ रखकर गंगाजल लेने पहुंच रही हैं। शिवभक्ति के रंग में रंगे श्रद्धालु बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ अपने अपने गंतव्य की ओर पैदल रवाना हो रहे हैं। प्रशासन के अनुसार, कांवड़ मेले में अब तक हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या एक करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। आगामी दिनों में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है। हरकी पैड़ी, सुभाष घाट और मालवीय घाट समेत सभी प्रमुख घाटों पर सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बनी हुई है। गंगाजल भरने के बाद कांवड़िए अपने गंतव्य की ओर निकल रहे हैं। इस बार मेले में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से बढ़ी है। कई महिलाएं परिवार के साथ कांवड़ यात्रा कर रही हैं, जबकि बड़ी संख्या में महिला समूह भी नजर आ रहे हैं। वहीं छोटे-छोटे बच्चे भी अपने माता-पिता और भाई बहनों के साथ कंधों पर छोटी कांवड़ रखकर शिवभक्ति का संदेश दे रहे हैं। रंग बिरंगी और आकर्षक कांवड़ों के साथ श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है।ं छोटे बच्चे भी आस्था की इस यात्रा में पीछे नहीं हैं। कोई बच्चा दोनों तरफ गंगाजल भरी हुई कांवड़ ले जाता दिखाई दे रहा है, तो कोई अपने सामर्थ्य के अनुसार पारंपरिक बांस की बनी कांवड़ ले जाता नजर आ रहा है। बिना किसी मनोकामना के बस बच्चे गंगाजल लेकर अपने गंतव्यों को रवाना हो रहे हैं। वहीं अब 8 से 11 अगस्त के बीच डाक कांवड़ और 11 अगस्त को श्रावण शिवरात्रि के मुख्य जलाभिषेक को लेकर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। नागरिक पुलिस के साथ अर्द्धसैनिक बल, एटीएस, बीडीएस, एसडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें प्रमुख घाटों, मंदिरों और संवेदनशील स्थानों पर की गई है। साथ ही यातायात व्यवस्था पर नजर रखने के लिए हरिद्वार में 10 ड्रोन जोन बनाए गए हैं। जबकि ऋषिकेश और नीलकंठ क्षेत्र में 4 अतिरिक्त ड्रोन निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा चारधाम कंट्रोल रूम से 529 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे मेला क्षेत्र की 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है। खास बात है कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मार्गदर्शन संबंधी क्यूआर कोड भी जारी किया गया है।

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