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वैली ब्रिज टूटने के 48 घंटे बाद भी नही बन पाई कोई वैकल्पिक व्यवस्था

जान जोखिम में डाल कर रहे लोग आवाजाही
पिथौरागढ़। सीमांत जिले के धारचूला में कुलागाड़ वैली ब्रिज को टूटे 48 घंटे बीत चुके हैं, किन्तु अब तक वैकल्पिक पुल तैयार नहीं हो सका है। भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण पुल के टूटने से दारमा, व्यास और चैदास घाटी समेत करीब 35 हजार की आबादी का धारचूला मुख्यालय से संपर्क संकट में है।
गौर हो कि बीती 11 सितंबर की देर रात जुम्मा गांव के ऊंचाई वाले क्षेत्र में अतिवृष्टि के बाद कुलागाड़ नाला अचानक उफान पर आ गया था। ऐसे में तेज बहाव की चपेट में आने से कुलागाड़ का वैली ब्रिज टूट गया और देखते ही देखते तीनों घाटियों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। पुल टूटने के बाद सबसे बड़ी चुनौती लोगों को सुरक्षित तरीके से नाले के आर-पार पहुंचाने की है। हालात को देखते हुए सेना के जवानों ने मोर्चा संभाला और रस्सियों व सीढ़ियों के सहारे पैदल आवाजाही शुरू कराई। इससे लोगों को कुछ राहत तो जरूर मिली, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आदि कैलाश और अन्य धार्मिक यात्राओं के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं को भी जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करना पड़ रहा है। यहां एक छोटी सी चूक या जरा सी लापरवाही किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। वहीं, 48 घंटे गुजरने के बाद भी वैकल्पिक पुल तैयार नहीं होने से ग्रामीणों का गुस्सा और चिंता बढ़ती जा रही है। सड़क और पुल की सुविधा के अभाव में लोगों को रस्सियों के सहारे चट्टानों के बीच से गुजरना पड़ रहा है। बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और बीमार लोगों के लिए यह रास्ता किसी अग्निपरीक्षा से कम साबित नहीं हो रही है। आलम ये है कि लोग रस्सियों के सहारे चट्टानों को पार कर रहे हैं। उफनते नाले के बीच जान हथेली पर रखकर आवाजाही हो रही है। कुलागाड़ में बैली ब्रिज के निर्माण कार्य का आज अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने स्थलीय निरीक्षण किया। जिलाधिकारी आशीष भटगांई के निर्देशानुसार अपर जिलाधिकारी ने कुलागाड़ पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ब्रिज निर्माण की कार्यदायी संस्था बीआरओ के अधिकारियों को निर्देशित किया कि ब्रिज का कार्य त्वरित गति से किया जाए। ताकि, जल्द से जल्द यातायात व्यवस्था संचालित की जा सके। अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने बीआरओ के अधिकारियों को कहा कि यह मार्ग कई मायनों में महत्वपूर्ण है, इसलिए लोगों की जरूरतों और पर्यटन गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए पुल बनाने का काम किया। उन्होंने अस्थायी रूप से सेना के सहयोग से बनाए गए पैदल मार्ग का भी निरीक्षण किया और इस संबंध में संबंधितों को निर्देश दिए कि पैदल यात्रियों का सुरक्षित रूप से आवागमन कराया जाए। सभी संबंधित अस्थायी पुल पर तैनात रहें। उन्होंने लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि नदी के अतिरिक्त मलबे को भी जल्द से जल्द साफ किया जाए। जिससे यातायात जल्द शुरू किया जा सके। उन्होंने कहा कि आदि कैलाश यात्रा के दृष्टिगत भी पुल अति महत्वपूर्ण है। इसलिए इस कार्य में विलंब न किया जाए।

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