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पतंजलि योगपीठ में जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाया गया आचार्य बालकृष्ण जी का जन्मदिवस

जो कार्य WHO नहीं कर पाया, देश व दुनिया की बड़ी-बड़ी सरकारें नहीं कर पाईं, आयुर्वेद में वह कार्य पतंजलि रिसर्च फाउण्डेशन ने करके दिखाया : स्वामी रामदेव

जन्मदिन मनाने का अर्थ संकल्प लेने का दिन है, श्रेष्ठ कार्य करने का संकल्प लें : आचार्य बालकृष्ण

• आचार्य जी ने 40 ग्रंथों के रूप में दिया रिटर्न गिफ्ट, प्रस्तुत किया एक साल का रिपोर्ट कार्ड
• साक्ष्य आधारित 12 आयुर्वेदिक औषधियों का लोकार्पण
• स्वामी रामदेव जी व आचार्य बालकृष्ण जी के साथ लगभग 710 लोगों ने किया रक्तदान
• पतंजलि इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल के तत्वावधान में लगभग 1500 रोगियों की नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर व बड़े स्तर पर नि:शुल्क औषधीय वितरण
• पतंजलि योग समितियों के माध्यम से किया गया जड़ी-बूटियों का नि:शुल्क वितरण

हरिद्वार, 04 अगस्त : पतंजलि योगपीठ के महामंत्री एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण जी का जन्मदिवस पतंजलि वैलनेस, पतंजलि योगपीठ-2 के योगभवन सभागार में जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर हजारों लोगों ने रक्तदान शिविर, नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर, नि:शुल्क औषधि वितरण का लाभ उठाया।
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योग-आयुर्वेद काे मिलेगा विश्व चिकित्सा पद्धति का दर्जा : स्वामी रामदेव
कार्यक्रम में परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने आचार्य जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि योग, आयुर्वेद, स्वदेशी, सनातन जीवन पद्धति जो सार्वभौमिक, वैज्ञानिक सर्वहितकारी है, ये लोगों की जीवन पद्धति बने। हम आश्वस्त हैं कि योग, आयुर्वेद स्वस्थ लोगों की जीवन पद्धति बनेगा। रोगियों के लिए एक विश्व चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित होगा और योग-आयुर्वेद-नेचुराेपैथी विश्व चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रतिष्ठापित होंगी।
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1835 से चली आ रही मैकाले की शिक्षा पद्धति की गुलामी का दौर खत्म होगा, भारतीय शिक्षा बोर्ड से जुड़ेंगे लाखों स्कूल
स्वामी जी ने कहा कि 1835 से देश में मैकाले की भ्रष्ट शिक्षा पद्धति की गुलामी का, पराधीनता का, जो दौर चल रहा था, वह अब खत्म होगा। देश के हजारों-लाखों स्कूलों को हम भारतीय शिक्षा बोर्ड से जोड़ेंगे। अपने पूर्वजों की महान विरासत को विज्ञान के साथ जोड़कर, अपने अनुभवों को अनुसंधान के साथ जोड़कर, दृष्टि, दक्षता, शोध, बोध, हमारे प्राचीन ऋषियों की आइडियोलॉजी और आधुनिक नवाचार के साथ टेक्नोलॉजी का समावेश करके पतंजलि आगे बढ़ रहा है।
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पतंजलि रिसर्च फाउण्डेशन ने योग-आयुर्वेद को साक्ष्य आधारित बनाया
आज एक हजार से ज्यादा जड़ी-बूटियों के फिंगर-प्रिंट्स पतंजलि ने तैयार करके परम्परागत औषधियों में जो रस, रसायन, भस्म, पिष्टी, पाक, चूर्ण, अवलेह, आसव, अरिष्ठों का जो हमारा हजारों वर्षों से विधि-विधान था, हमने इसके लिए 100% पुरुषार्थ किया है। आयुर्वेद की हजारों वर्ष पुरानी परम्परा पर वैज्ञानिक शोध कर उन पर सेल ट्रायल, एनिमल ट्रायल व ह्यूमन ट्रायल करके ड्रग डिस्कवरी का पूरा क्रम को पूरा करते हुए लिवर फेल्योर व किडनी फेल्योर के लिए रिसर्च व एविडेंस बेस्ड औषधियाँ तैयार की हैं। जब देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने कहा था कि आप आयुर्वेद को मेडिसिन का दर्जा दिलाइए, और यह कार्य श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी के मार्गदर्शन में हुआ और विश्व के टॉप 2% वैज्ञानिकों में पूज्य आचार्य जी का नाम आता है। आयुर्वेद में वैज्ञानिक के तौर पर तो पूरे विश्व में इकलौता नाम पिछले 7 साल से केवल आचार्य जी का ही आ रहा है।
स्वामी जी ने कहा कि मात्र विश्व के 2% वैज्ञानिकों में सम्मिलित होना ही बड़ी बात नहीं है अपितु आयुर्वेद के क्षेत्र में जाे सदियों से जो वैज्ञानिक अनुसंधान नहीं हुआ था, वह कार्य पतंजलि ने किया है। पतंजलि ने अनुसंधान आधारित लिवर फेलियर, किडनी फेलियर, टाइप-।, टाइप-।। व टाइप-।।। डायबिटीज़, बी.पी., थायरॉयड व इनके काम्पलीकेशंस, ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट अटैक, त्रिदोष- वात, पित्त, कफ जनित रोग, कम्युनिकेबल डिज़ीज, नॉन-कम्युनिकेबल डिज़ीज, लाइफ स्टाइल डिज़ीज, क्रॉनिकल व इन्क्योरेबल डिज़ीज, यहाँ तक की जेनेटिक डिज़ीज को भी रिवर्स करके प्रत्यक्ष प्रमाणों के द्वारा व साइंटिफिक एविडेंस के साथ पतंजलि ने सम्पन्न करके दिखाया है। पूरी दुनिया के लिए पतंजलि आज एक प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि जो कार्य WHO नहीं कर पाया, देश व दुनिया की बड़ी-बड़ी सरकारें नहीं कर पाईं, आयुर्वेद में वह कार्य पतंजलि रिसर्च फाउण्डेशन ने करके दिखाया है।
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जन्मदिन संकल्प लेने का दिन है : आचार्य बालकृष्ण
जड़ी-बूटी दिवस के अवसर पर श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अध्यात्म, परमार्थ व सेवा की ओर होता है तो एक जीवन तो क्या अनेक जीवन भी लगाना पड़े तो वह भी कम है। उन्होंने कहा कि जन्मदिन मनाने का अर्थ एक संकल्प लेने का दिन है। हमने आज यहाँ से सम्पूर्ण मानवता को रोगमुक्त करने का, वृक्षारोपण का, रक्तदान का और श्रेष्ठ कार्य करने का संकल्प लिया है व सभी को ऐसे संकल्प लेने के लिए प्रेरित भी किया है। आचार्य जी ने कहा कि हम पिछले तीन दशक से यह परम्परा हम जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मना रहे हैं। अभी तक हमने करोड़ों पौधे रोपित किए हैं। हम साक्ष्य आधारित नवीन आयुर्वेदिक औषधियों तथा पुस्तकों के रूप में वर्ष भर जो भी कार्य करते हैं उसको एक वर्ष के रिपोर्ट कार्ड के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
आचार्य जी ने कहा कि प्रकृति से हम हैं, हमारी संस्कृति है। संस्कृति को बचाने के लिए यदि प्रकृति को बचाना आवश्यक है। इसके लिए यदि जड़ी-बूटी दिवस एक बहाना है, तो सभी इसका लाभ उठाएँ। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने देशवासियों से आह्वान किया था कि एक पौधा माँ के नाम से अवश्य लगाएँ। पतंजलि उस अभियान को पिछले तीन दशकों से चला रहा है। प्रसन्नता की बात है कि सरकार के स्तर से भी अब इस तरह के प्रयास हो रहे हैं।
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साक्ष्य आधारित 12 आयुर्वेदिक औषधियों का लोकार्पण
इस पावन अवसर पर पतंजलि अनुसंधान संस्थान के ड्रग डिस्कवरी डिविजन द्वारा 12 नवविकसित साक्ष्य आधारित आयुर्वेदिक औषधियों- हीमोग्रिट वाइटल सिरप, रीनोग्रिट सिरप, लिवोग्रिट सिरप, टमीग्रिट टमी रोल-ऑन, स्वर्ण ओज प्राशन ड्रॉप, लिपिडोम एडवांस टेबलेट, पीड़ानिल रोल-ऑन, एलोग्रिट पाउडर, आईग्रिट एडवांस आई ड्रॉप, ईजग्रिट किट, टायफाेग्रिट अवलेह और आयु—प्राइम कैप्सूल काे रोगियों के हितार्थ लोकार्पित करते हुए आचार्य जी ने कहा कि ये नवीन औषधियाँ पतंजलि के विश्वस्तरीय अनुसंधान व साक्ष्यों के आधार पर निर्मित की गई हैं जिनका लाभ समूची मानवता को, विशेषकर बच्चों को मिलेगा। पतंजलि अनुसंधान संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने बताया कि इन औषधियों पर वैज्ञानिक शोध के उपरांत एनिमल व ह्यूमन ट्रायल किए जा रहे हैं जिनमें हमें अपार सफलता मिल रही है।
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आचार्य जी ने 40 ग्रंथों के रूप में दिया रिटर्न गिफ्ट, दिया एक साल का रिपोर्ट कार्ड
जड़ी-बूटी दिवस–2026 के शुभ अवसर पर पतंजलि हर्बल रिसर्च डिविजन के तत्वाधान में आचार्य जी द्वारा रचित कुल 40 पुस्तकों का विमोचन किया गया, जिनमें सर्वप्रथम वर्ल्ड बॉटनिकल डिक्शनरी (World Botanical Dictionary) की 3 पुस्तकें रहीं। इस नौ-खंडीय ‘वर्ल्ड बॉटनिकल डिक्शनरी’ में ब्रायोफाइट्स से एंजियोस्पर्म्स तक लगभग 1 लाख 20 हजार वंश एवं प्रजाति-नामों की व्युत्पत्ति, अर्थ और शुद्ध उच्चारण अंग्रेजी एवं हिंदी—दोनों भाषाओं में एक साथ संकलित किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त इन्साइक्लोपीडिया ऑफ हर्बल रेमेडीज़ (Encyclopedia of Herbal Remedies (EOHR)) की 13 पुस्तकों, इन्साइक्लोपीडिया ऑफ इण्डियन हर्बस (Encyclopedia of Indian Herbs) की 7 पुस्तकों तथा NCVET Curriculum Modules पर 16 पुस्तकों का भी विमोचन किया गया।
और अंत में Ancient Wisdom Through the Lens of Science: Evidence, Excellence, Eminence पुस्तक काे लोकार्पण किया गया। पतंजलि अनुसंधान संस्थान के ड्रग डिस्कवरी एंड डेवलपमेंट डिवीजन द्वारा किए गए वैज्ञानिक अनुसंधानों (140 Research Papers) का प्रामाणिक संकलन है। आयुर्वेद के प्राचीन सिद्धांतों पर आधारित यह कृति विश्व के लिए एक प्रेरणास्रोत है, जो यह प्रदर्शित करती है कि अभिनव वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रमाण-आधारित शोध और आधुनिक वैज्ञानिक-पद्धतियों के माध्यम से आयुर्वेद वैश्विक स्वास्थ्य के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान कर सकता है।
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स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन
स्वामी रामदेव जी व आचार्य बालकृष्ण जी ने स्वयं रक्तदान कर जनसामान्य को जीवन रक्षा के लिए रक्तदान करने हेतु भी प्रेरित किया। कार्यक्रम में लगभग 710 यूनिट रक्तदान हुआ। सुबह से ही पतंजलि संन्यासाश्रम के संन्यासीगण, पतंजलि में सेवारत कर्मयोगीगण व पतंजलि शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने रक्तदान हेतु रजिस्ट्रेशन कराना शुरू कर दिया था। रक्तदान शिविर में पतंजलि अनुसंधान संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. अनुराग वार्ष्णेय तथा जी.एम. ऑपरेशन्स डॉ. प्रदीप नैन की विशेष भूमिका रही।
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पतंजलि इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल के तत्वावधान में नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर
इस अवसर पर पतंजलि इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल के तत्वावधान में विशाल नि:शुल्क चिकित्सा शिविर संचालित किया गया जिसमें लगभग 1500 रोगियों की नि:शुल्क रक्त जाँच, ब्लड प्रेशर जाँच व मधुमेह की जाँच की गई। इसके साथ-साथ आर्थोपेडिक विभाग में डॉ. मनोज त्यागी, कार्डियोलॉजी विभाग में डॉ. कृष्णा सीके, नेत्र परीक्षण (आई) में डॉ. सुशील कुमार, मेडिसिन में डॉ. अनिल दास व डॉ. अभिनव, दंत रोग (डेंटल) में डॉ. गुरप्रीत ओबेरॉय तथा फिजियोथेरेपी विभाग में डॉ. नेहा ने जाँच कर रोगियों को नि:शुल्क औषधि वितरण किया। उक्त शिविर के संचालन में डॉ. कुलदीप सिंह व डॉ. सुनील आहूजा की विशेष भूमिका रही।
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औषधीय पौधों का नि:शुल्क वितरण
जड़ी-बूटी दिवस के अवसर पर स्वामी रामदेव जी व आचार्य बालकृष्ण जी ने उपस्थित जनसमूह को स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज, स्वस्थ राष्ट्र से स्वस्थ विश्व के लिए कम से कम एक वृक्ष लगाने हेतु प्रेरित व संकल्पित कराया। इस अवसर पर पतंजलि योग समितियों के माध्यम से जड़ी-बूटियों यथा- नीम, तुलसी, एलोवेरा, लौंग तुलसी, आंवला आदि का निःशुल्क वितरण किया गया।
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कार्यक्रम में पतंजलि योगपीठ से सम्बद्ध सभी प्रकल्पों तथा शिक्षण संस्थानों के संन्यासी, अधिकारी, कर्मयोगी, शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षकगण तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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