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पदोन्नति की मांग को लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन

-काली फीती बांधकर जताया विरोध
-बोले—एक प्रदेश में दो कानून क्यों?
हरिद्वार । चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की लंबित पदोन्नति समेत विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारियों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। पूर्व घोषित आंदोलन कार्यक्रम के तहत कर्मचारियों ने प्रदेशभर में काली फीती बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद विभाग पर उनकी मांगों की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाया।
प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा और महामंत्री सुनील अधिकारी ने कहा कि कर्मचारियों की पदोन्नति का मामला पिछले करीब दस वर्षों से लंबित है। पशुपालन विभाग में नियमावली-2019 के तहत वन टाइम सेटलमेंट के माध्यम से 297 पद सृजित कर हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट कर्मचारियों को पदोन्नति दी जा चुकी है, जबकि स्वास्थ्य और आयुर्वेद विभाग के कर्मचारी पद उपलब्ध होने के बावजूद पदोन्नति की राह देख रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही प्रदेश में अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों के लिए अलग-अलग नियम क्यों लागू किए जा रहे हैं।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि कोरोना काल में वार्ड ब्वाय, वार्ड आया और सफाई सेवकों ने सबसे पहले मरीजों की सेवा के लिए वार्डों में पहुंचकर जिम्मेदारी संभाली थी। इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से ऑक्सीजनरेटर, जनरेटर, ड्रेसर, प्लास्टर सहायक, लैब सहायक, डार्क रूम सहायक, ओटी सहायक और पुस्तकालय सहायक जैसे कार्य भी लिए जा रहे हैं, लेकिन पदोन्नति की बारी आने पर इन कर्मचारियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय स्तर पर कर्मचारियों के साथ वर्षों से अन्याय और उत्पीड़न हो रहा है। कर्मचारी अपनी समस्याएं उठाते हैं तो उन्हें दबाव और नौकरी संबंधी धमकियों का सामना करना पड़ता है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा शासन को स्पष्ट निर्देश दिए जाने और शासनादेश होने के बावजूद स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की पदोन्नति नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। कर्मचारियों ने पौष्टिक आहार भत्ता, वर्दी भत्ता और धुलाई भत्ता बढ़ाने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि मरीजों के संपर्क में रहने के बावजूद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नर्सिंग संवर्ग की तर्ज पर पौष्टिक आहार भत्ता नहीं दिया जा रहा है। इसी तरह धुलाई भत्ते में भी भारी अंतर है। कर्मचारियों के अनुसार उन्हें 90 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, जबकि अन्य संवर्गों को 500 रुपये तक धुलाई भत्ता दिया जाता है।
प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा ने कहा कि जल्द ही संगठन मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर विभागीय अव्यवस्थाओं और कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठन अब चिकित्सा स्वास्थ्य और आयुर्वेद विभाग में कर्मचारियों के साथ हो रहे कथित भेदभाव की पूरी तस्वीर सामने रखेगा।
प्रदर्शन में प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र तेश्वर, मंडल अध्यक्ष गढ़वाल राजेंद्र रावत, मंडल अध्यक्ष कुमाऊं भोपाल शाह, जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार, जिला मंत्री राकेश भंवर, प्रदेश संगठन सचिव दिनेश गुसाईं सहित दिनेश लखेड़ा, सुनील अधिकारी, नवीन नवानी, मूलचंद चौधरी, नाथी राम, ताजबर सिंह, मनीष पंवार, अनिल कुमार, पप्पू, राजू कश्यप, लोकेंद्र, त्रिलोकी, अंकित, मोहित, रोहन, नीलम, कमलेश, ममता, ईशा, बृजेश, कैलाशो डोली, नितिन, अमित, प्रबल सिंह, ज्योति नेगी, सतीश और विनोद प्रवीण समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल रहे।

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