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सतीकुंड सौंदर्यकरण की लागत पर अशोक त्रिपाठी ने उठाए सवाल

हरिद्वार, वरिष्ठ भाजपा नेता एवं गंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने कहा कि उत्तराखंड में सब उत्तराखंडी है। ऐसे में पहाड़ मैदान, गढ़वाल और कुंमांउ की बात नहीं होनी चाहिए। प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए अशोक त्रिपाठी ने कहा कि जिस मंशा के साथ हरिद्वार को उत्तराखंड को मिलवाया गया था। वह पूरी नहीं हुई और हरिद्वार उपनिवेश बनकर रह गया है। सरकार को हरिद्वार को उत्तराखंड में मिलाने में भूमिका निभाने वालों के बारे जानना चाहिए। उत्तराखंड राज्य के गठन में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता डा.मुरली मनोहर जोशी इस सबंध में बेहतर जानकारी दे सकते हैं। अशोक त्रिपाठी ने कनखल स्थित सतीकुंड के सौंदर्यकरण कार्य की लागत और राज्य से बाहर की कंपनियों को काम दिए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तय की गयी लागत से बहुत कम में सौंदर्यकरण कराया जा सकता है। उन्हें जो जानकारी मिली है। उसके अनुसार कार्यदायी संस्था ने कुंड में जलप्रवाह की संभावनाओं से भी इंकार किया है। जबकि कुंड में आचमन, स्नान के लिए जलप्रवाह और जलनिकासी की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सतीकुंड सौंदर्यकरण योजना की जांच के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजा है। सरकार को योजना को लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और इस कार्य को राज्य की संस्थाओं और स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से कराना चाहिए। उन्होंने प्रस्तावित कॉरिडोर के निर्माण पर भी सवाल उठाए। कहा कि अब तक कॉरिडोर को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। जिससे कॉरिडोर को लेकर लोगों में भ्रम बना हुआ है। अगले वर्ष होने वाले अर्धकुंभ को कुंभ प्रचारित किए जाने पर उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों को मान्यतों के विपरीत नहीं किया जाना चाहिए। गंगा सभा द्वारा अपने पंचांग एवं अन्य पत्रों में अर्धकुंभ ही अंकित किया हुआ है।

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